अनटोल्ड स्टोरी-कारसेवा 1990 (4)
(राजेन्द्र बागड़ी, स्वतंत्र पत्रकार)
Special Story. 18 जनवरी ( दैनिक ब्यूरो नेटवर्क)
“अयोध्या में परिंदा भी पर नही मार सकता!,” ये वाक्य सत्ता मद में चूर उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के थे। अयोध्या को अभेद किले में तब्दील करने के बाद सरकार भले ही सन्तुष्ट थी लेकिन भीतर ही भीतर सरकार में एक ख़ौफ़ जरूर था। जैसे- जैसे 30 अक्टूबर की तिथि नजदीक आरही थी, वैसे- वैसे मुलायम सरकार का रुख कारसेवकों के प्रति बर्बरता पूर्ण होता जा रहा था।
हर दिन के अखबार पुलिस की ज्यादतियों से रंगे जारहे थे। फतेहगढ जेल में कारसेवकों में तरह- तरह से चर्चाएं थी। उनतीस अक्टूबर की रात बेहद तनाव में कटी। आने वाले दिन की कल्पना से मस्तिष्क सिहर उठता था। सरकार के अहंकार ओर कारसेवकों के संकल्प के बीच होने वाली जंग के परिणाम पर सबकी नजर थी। हम सब जेल में बंद असहाय से थे, बस दुवाएं उन कारसेवकों के साथ थी, जो बाहर थे और संघर्ष करने पर आमादा थे। इसी दिन अयोध्या जाने वाले सभी रास्ते बंद थे, बसे, वाहन, ट्रेन, निजी वाहनों को पूरी तरह रोक दिया गया। बंदिशें भारी थी। उत्तरप्रदेश ” रामलहर” से उद्देलित हो उठा था। शाम 5 बजे फतेहगढ जेल में लगी कारसेवकों की शाखा में अखिल भारतीय मजदूर संघ के तत्कालीन अध्यक्ष दत्तोपंत ठेंगड़ी ने घोषणा की थी कि अयोध्या में अगले दिन 30 अक्टूबर को होने वाली कारसेवा को दुनिया की कोई ताकत नही टाल सकती। ये रात बड़ी तनावपूर्ण थी। पूरी रात बस यूं ही कटी।
और फिर वह तारीख आ गई 30 अक्टूबर 1990 की, जिसका पूरे देश को इंतजार था। सुबह 6 बजे 15 हजार की संख्या में कारसेवक फतेहगढ जेल के विशाल प्रांगण नियमित लगने वाली शाखा में एकत्रित हुए। शाखा में साध्वी ऋतम्भरा के गुरु युगपुरुष परमानन्द जी, अखिल भारतीय मजदूर संघ के अध्यक्ष दत्तोपंत ठेंगड़ी, सांसद संघप्रिय गौत्तम समेत कई बड़े वक्ताओं ने सम्बोधित करते हुए कारसेवा के संकल्प के पूरा होने का विश्वास जताया व कहा कि सुबह 11 बजे अयोध्या में कारसेवा शुरू होगी तब तक सभी कारसेवक ” राम कीर्तन” करेंगे। लगभग 4 घण्टे तक भगवान श्रीराम के भजनों, कीर्तन में बीते। बाहर की कोई खबर जेल के भीतर नही आरही थी। हर जगह रोक थी। जेल में मिलने वाले आंगतुकों को भी रोक दिया गया। तीस अक्टूबर को सुबह के भोजन के बाद सभी ये जानने को उत्सुक थे कि सुबह 11 बजे आखिर क्या हुआ? अयोध्या में कारसेवा हुई कि नही!
अपरान्ह बाद जेल में खबर आई कि सेंकडो बन्दिशो के बावजूद कारसेवकों ने अयोध्या में अपनी जान की बाजी लगाते हुए विवादित ढांचे पर चढ़ गए और वहाँ भगवा झंडा फहरा दिया। इस दौरान अयोध्या में भीषण जनसंहार, बर्बरता की खबरें भी चर्चा का कारण बनी लेकिन सभी कारसेवकों को 31 अक्टूबर के अखबारों की प्रतीक्षा बड़ी बेसब्री से थी। हर कोई अयोध्या की कारसेवा के बारे में विस्तार व प्रमाणिकता के तौर पर जानना चाहता था। 30 अक्टूबर की शाम को फिर जेल में लगी कारसेवकों की विशाल शाखा में उक्त वक्ताओं ने रुंधे गले से घोषणा की अयोध्या में कारसेवा हुई है और बड़ी संख्या में कारसेवकों के मारे जाने की सूचना है। तत्समय ये भी बताया गया कि जोधपुर के दो कोठारी बंधुओ ने ढांचे पर भगवा ध्वज फहराया ओर उन्हें यूपी पुलिस ने गोली मार दी। हजारों कारसेवक घायल होने की खबरें बताई गई। अयोध्या की खबरों से सब उदास थे। अपुष्ट खबरों से सब चिंतित थे। तीस अक्टूबर को दिनभर जैसे कोई बात आती कारसेवक जानने के लिए दौड़ पड़ते। अजीब सी उदासी, खामोशी भरे उन क्षणों के बारे मे लिखना कठिन है उन पलों के लिए शब्द नही है। ये रात भी आंखों में कटी सिर्फ इंतजार था 31 अक्टूबर के सुबह जेल में आने वाले अखबारों का। अयोध्या का हाल जानने की उत्सुकता भारी पड़ रही थी।
फिर सुबह हुई। वहीं नियमित शाखा लगी। जिसमें हमें अखबारों में छपी घटनाओं का व्रतांत सुनाया, जिसे सुनकर सब बदहवास थे। सन्तुष्टि सिर्फ इस बात को लेकर थी कि मुलायम सिंह सरकार के दम्भ को कारसेवकों ने अपना बलिदान देकर ध्वंस कर दिया और हिंदुओं के बलिदान का एक नया इतिहास कायम कर दिया। बाद में सभी कारसेवकों को अखबार मिले तो हर घटना को बारीकी से जाना और समझा। अखबारों में अयोध्या की जमी रक्तरंजित थी, कारसेवकों पर मुलायम सरकार ने बड़ी बर्बरता की। अखबारों के पन्नो पर सिर्फ लाशों , घायलों से अटे चित्र छपे थे। जिन्हें हर कोई देखता तो सिहर जाता।
तीस अक्टूबर को प्रकट हुए थे अशोक सिंहल– मुलायम सिंह यादव की सरकार को ठेंगा दिखाते हुए 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री व रामजन्म भूमि आंदोलन के रचनाकार अशोक सिंहल सेना की वर्दी में प्रकट हुए। ये खबर तब के दैनिक जागरण, आज, अमरउजाला में छपी थी। ये अपने आपमे बड़ी खबर थी। दूसरी सबसे बड़ी खबर थी ढांचे पर भगवा ध्वज फहराने की, जिसका सभी अखबारों के पहले पेज पर 8 कॉलम का लीड फोटो छपा था, जिसका केप्शन था” मुलायम सरकार का दम्भ चकनाचूर” कारसेवकों ने ढांचे पर लहराया भगवा” जैसे शीर्षकों से अखबार रंगे थे।
कल भी जारी


