Saturday, April 25, 2026
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Homeधर्म कर्मसंत ईश्वर का दूसरा रूप होता है- डॉ. प्रभुलाल सैनी

संत ईश्वर का दूसरा रूप होता है- डॉ. प्रभुलाल सैनी

आचार्य विद्यासागर के मार्गो पर चलने का किया आव्हान, विनयांजलि आयोजन


Deoli News 25 फरवरी (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर को विनयांजलि अर्पित करने के लिए रविवार को सकल दिगम्बर जैन समाज आवां द्वारा गोपाल चौक आवां में आयोजन हुआ। इसमें मुख्य अतिथि पूर्व कृषि मंत्री व भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. प्रभुलाल सैनी थे। उन्होंने कहा कि संत, ईश्वर का दूसरा रूप हैं, इस वजह से इन्हें द्विज भी कहा गया है।

संत शिरोमणी आचार्य विद्यासागर हमेशा दैदीप्यमान, ज्योतिपुंज की तरह हमारे जीवन को आलोकित व प्रकाशित करते रहेंगे। इन्होंने अंतिम सांस तक दीपक की तरह जलकर मानव जीवन को सत्य व अहिंसा का मार्ग दिखाया है। आचार्यश्री का सम्पूर्ण जीवन सम्यक ज्ञान, सम्यक दर्शन व सम्यक चरित्र पर आधारित रहा। उनका तप व त्यागमय जीवन आत्मबोध के साथ लोकबोध के लिए समर्पित रहा। आचार्य का अद्भुत व विराट ज्ञान, असीम करुणा सम्पूर्ण सृष्टि व मानवता के उत्थान के लिए न्यौछावर रहे। उनके, सदाचरण व धर्मोपदेश से मानव जीवन में सत्य, अहिंसा के बीजारोपण के साथ अच्छे किसान, गोपालन, स्वरोजगार व आत्मनिर्भर बनने की कुंजी मिली है। इन्हें 1968 में मुनि दीक्षा के साथ ही जीनस वर्ड रिपोर्ट में ब्रह्मांड देवता के रूप में तथा इंडिया वर्ड रिकार्ड के द्वारा तपस्वी सम्राट की उपाधि से सम्मानित किया गया।

इस दिव्य व महान संत के श्रीचरणों में आज पूरा देश व विश्व विनयांजलि अर्पित कर रहा है। उन्होंने कहा कि हम संकल्प लें कि, सन्तश्री के आदर्श, उपदेशों को जीवन में आत्मसात करेंगे। काम, क्रोध, लोभ, मोह, ईर्ष्या व अभिमान को तज, सरल, सादा, स्वच्छ, निर्मल अपनाएंगे। विकार-विकृतियों, कामनाओं व वासनाओं से मुक्त होंगे। यह ही सच्ची विनयांजलि होगी। यह अभूतपूर्व, ऐतिहासिक प्रेरणीय व यादगार पल है, जिसमें मुझे भी भाग लेने का यब अवसर मिला है। इस दौरान सरपंच दिव्यांश भारद्वाज व पूर्व सरपंच राधेश्याम चन्देल के आथित्य में जैन समाज के साथ सर्वधर्म के लोगों ने भाग लिया।

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