दिल्ली सरकार पर असमंजस बरकरार!
राजेन्द्र बागड़ी, वरिष्ठ पत्रकार
Desk Report 23 मार्च ( दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) करोडों के शराब घोटाले में आखिरकार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ईडी की गिरफ्त में आ गए। दिल्ली हाईकोर्ट की और से केजरीवाल को गिरफ्तारी से सुरक्षा देने से मना करने के बाद जाहिर था कि केजरीवाल को अब गिरफ्तारी से कोई नही रोक सकेगा, और कुछ घण्टों के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी के बाद जो बयान सर्वाधिक चर्चित हुआ।
वह है केजरीवाल इस्तीफा नही देंगे और जेल से सरकार चलाएंगे!! ये सवाल राजनीतिक क्षेत्रों में ज्यादा उबाल खा रहा है। करीब 100 करोड़ के शराब घोटाले की चिंगारी केजरीवाल तक पहुँच गई। ईडी की और से रिमांड की मांग के दौरान जो सबूत कोर्ट के सामने रखे गए, उनकी काट न केजरीवाल के पास थी और न ही उनके वकीलों के पास। आखिरकार उन्हें कोर्ट ने 6 दिन की ईडी की हिरासत में भेज दिया गया। ये सब कानून, सबूतों के आधार पर हुआ। फिर भी आप पार्टी ने ये आरोप लगाए कि ये राजनीतिक साजिश के तहत हुआ तो ये सिर्फ मुगालता फैलाने के लिए बयानबाजी की जारही है। केजरीवाल की गिरफ्तारी अपने आप मे देश के इतिहास की पहली घटना होगी, जब मुख्यमंत्री पद पर होते हुए उन्हें गिरफ्तार किया गया। जबकि झाड़खंड के मुख्यमंत्री हेमंत शोरेन ने नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दिया था।
लालू प्रसाद ने चारा घोटाले के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था, ऐसे क़ई उदाहरण है। जब प्रथम दृष्टया दोष सिद्ध होने अथवा जांच में गिरफ्तार होने पर पद से इस्तीफे दिए गए है। ये ऐसा पहला मौका है जब केजरीवाल ईडी की हिरासत में होने के बावजूद मुख्यमंत्री है और वे कह भी रहे है कि वे बाहर हो या अंदर सरकार चलाते रहेंगे। अब सवाल ये है कि क्या सविंधान में ऐसा है? क्या जेल से सरकार चलाना संभव है? हालांकि इस मुद्दे पर सविंधान में स्पष्ट नही है लेकिन क्या ऐसा होना सही है। केजरीवाल 28 मार्च 2 बजे तक ईडी की हिरासत में है, जहाँ उनसे गहन पूछताछ होगी। क़ई नए तथ्यों से पर्दा उठेगा तो नए रहस्य भी खुलेंगे। ऐसे में ये उम्मीद करना लगभग बेकार सा है कि केजरीवाल बच जाए! ईडी की पूछताछ में और तथ्य सामने आए तो ईडी फिर रिमांड मांग सकती है तो क्या अगले पखवाड़े तक दिल्ली सरकार में मुख्यमंत्री जेल में ही रहकर काम करेंगे या उन्हें इस्तीफा देना पड़ेगा, ये सवाल ज्वलंत है। जेल मैनुअल के मुताबिक बंदी से मिलने के लिए कोर्ट से इजाजत लेना जरूरी है। तो क्या दिल्ली सरकार के अधिकारी मुख्यमंत्री का आदेश लेने के लिए पहले कोर्ट के चक्कर लगाएंगे?
यद्दपि कोर्ट में केजरीवाल को पद से हटाने के लिए याचिका दाखिल हो चुकी है, जिस पर कोर्ट को फैसला करना है। ये भी सही मानिए कि कोर्ट केजरीवाल को इतने गम्भीर आरोपो के बाद पद पर नही रहने देगी लेकिन सभी जरूरी तथ्यों को जानने के बाद केजरीवाल पद पर क्यों बना रहना चाहते है, ये गम्भीर सवाल है। हालांकि 28 मार्च को फिर से केजरीवाल को ईडी कोर्ट में पेश करेगी, तब ये पता लगेगा कि केजरीवाल का अगला भविष्य क्या होगा।छोड़िए अगर केजरीवाल को इस्तीफा देना पड़ा तो शर्तिया मानिए केजरीवाल अपनी पत्नी सुनीता केजरीवाल को ही मुख्यमंत्री बनाएंगे। केजरीवाल जानते है। यदि सरकार की शक्ति उनके पास से गई तो वे नाकारा हो जाएंगे। लिहाजा दिल्ली की अगली मुख्यमंत्री सुनीता केजरीवाल ही होगी। जैसे लालू यादव के बाद राबड़ी देवी मुख्यमंत्री बनी थी। हालांकि दिल्ली सरकार में नम्बर दो आतिशी भी दौड़ में तो रहेगी लेकिन केजरीवाल जब फैसला करेंगे तो भरोसा अपनी पत्नी पर ही जताएंगे।
सुनीता केजरीवाल खुद आयकर विभाग की जॉइंट डायरेक्टर रही है। लिहाजा उन्हें प्रशासनिक अनुभव तो है लेकिन सुनीता सियासी थपेड़ों का सामना कैसे कर पायेगी, ये सवाल पार्श्व में है। केजरीवाल की सोच में अपनी पत्नी मुख्यमंत्री के फ्रेम में इसलिए भी फिट दिख रही है कि सुनीता को सहानुभूति का लाभ सर्वाधिक मिलने के आसार है।


