गाइडलाइन के नियम दरकिनार, बाहरी टीम से हो निष्पक्ष जांच
Deoli News 3 अप्रैल (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) शहर में कई कोचिंग संस्थान ऐसे हैं, जो स्कूल टाइमिंग में कोचिंग का संचालन कर रहे हैं, जो नियम विरूद्ध है। वही ऐसे कोचिंग संस्थान भी है, जो 16 वर्ष की न्यूनतम आयु का उल्लंघन कर रहे हैं। कोचिंग संस्थानों में 16 वर्ष कम उम्र के बच्चे भी लिए जा रहे हैं।
इन कोचिंग संस्थानों में कक्षा 7 से लेकर 12 तक की कक्षाएं चलाई जा रही है। वह भी स्कूल टाइमिंग में, जबकि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की यह गाइडलाइन स्पष्ट है कि स्कूल टाइमिंग के दौरान बच्चों को कोचिंग नहीं दी जाएगी। इसके अलावा यह कोचिंग संस्थान आवासीय भवन में चल रहे हैं और तो और बेसमेंट में भी कोचिंग का संचालन अवैध है। इसके अलावा किसी भी कोचिंग संस्थान में एंट्री और एग्जिट गेट अलग होने चाहिए और स्टूडेंट की सेफ्टी सिस्टम का भी रिव्यू होना चाहिए। लेकिन इन सब बुनियादी नियमों का देवली में उल्लंघन हो रहा है।
मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी देवली सीमा पाराशर का कहना है कि स्कूल टाइमिंग में कोचिंग चलने की उनके पास कोई शिकायत नहीं है।
यह है मुख्य नियम
गौरतलब है कि 2024 में कोचिंग संस्थानों के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी निर्देशों में, 16 वर्ष से कम उम्र के छात्रों को कोचिंग में दाखिला नहीं दिया जा सकता। वहीं भ्रामक विज्ञापनों पर रोक है। छात्रों से लिखित सहमति लेकर ही उनके नाम और फोटो का उपयोग किया जा सकता है। लेकिन कोचिंग संस्थान पुराने से पुराने स्टूडेंट के फोटो लगाकर अपनी सफलता का दावा कर रहे हैं। इसकी पुष्टि रोजाना बटने वाली पंपलेट में देखी जा सकती।
बाहरी टीम से हो निष्पक्ष जांच
बता दे कि पूर्व में भी इस तरह के मामले उजागर होने पर जिला प्रशासन के निर्देश पर गठित टीम ने कोचिंग संस्थानों में जाकर जांच की। लेकिन ताज्जुब की बात है की जांच दल ने रिपोर्ट में नियमों उल्लंघन नहीं बताया। यहां तक की जिन कोचिंग संस्थानों में जाने के बाद जांच दल ने रिपोर्ट में लिखा कि वहां एक भी स्टूडेंट नहीं मिला। जबकि इस अवधि के कुछ मिनट बाद सैकड़ो छात्र छात्राएं कोचिंग संस्थानों से बाहर निकलते रहे। लिहाजा ऐसे कोचिंग संस्थान की निष्पक्ष जांच के लिए प्रशासन को बाहरी अधिकारियों के दल का गठन करना होगा, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके। स्थानीय कर्मचारी व अधिकारियों के दल इसमें केवल औपचारिकता बरतते हैं। यदि फिर से प्रशासन स्थानीय जांच दल से मामले की जांच कराता है तो स्थिति वही ज्यो की त्यों रहेगी।

स्कूलों में 11वीं 12वीं का औचित्य खत्म
उल्लेखनीय है कि देवली ही नहीं प्रदेश के कई इलाकों में कोचिंग संस्थानों की भरमार से परंपरागत शिक्षण व्यवस्था स्कूलों में कक्षा 11 व 12 खत्म होती जा रही है। अधिकतर स्टूडेंट कक्षा 10 पास करने के बाद ही कोचिंग संस्थानों से अध्ययन कर रहे हैं। लिहाजा देवली में निजी स्कूलों में कक्षा 11 व 12 का करीब करीब अस्तित्व खत्म हो गया है। वहीं जिन स्कूलों ने कक्षाएं शुरू की, उन्हें भी यह फैकल्टी बंद करनी पड़ी है। अभिभावकों का कहना है कि इसी तरह स्कूलों में अब कक्षा 9 व 10 में भी एडमिशन कम होने लगे। ऐसे में शिक्षा विभाग को इस विषय पर मंथन करना होगा कि यदि इन कक्षाओं की पढ़ाई कोचिंग संस्थानों में ही करवाई जा सकती है, तो ऐसे में मान्यता प्राप्त स्कूलों का क्या औचित्य रहेगा।



