भगवान मुनिसुव्रतनाथ की प्राचीन प्रतिमा से शुरू हुई अध्यात्मिक यात्रा
(महावीर जयंती विशेष)
Jahazpur News 10 अप्रैल (मोहम्मद आज़ाद नेब) जहाजपुर अब एक अनोखे और भव्य जिनालय के कारण देशभर में चर्चित है। ‘स्वस्तिधाम’ जिनालय शहर ‘जहाजपुर’ से प्रेरित होकर जहाज की आकृति में निर्मित किया गया है, जो न सिर्फ स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है, बल्कि आध्यात्मिकता और समाज की एकजुटता का प्रतीक भी बन चुका है।
इस आध्यात्मिक अध्याय की शुरुआत 23 अप्रैल 2013 को महावीर जयंती को हुई, जब नगर में भगवान मुनिसुव्रतनाथ की प्राचीन प्रतिमा भूगर्भ से प्रकट हुई। प्रशासन द्वारा प्रतिमा को अपने अधीन लिए जाने के बाद, आर्यिकास्वस्ति भूषण माताजी के प्रयासों से 29 अप्रैल को यह प्रतिमा समाज को सौंप दी गई। इसके बाद मंदिर निर्माण की योजना बनी और माताजी के सुझाव पर तय किया गया कि जिनालय की आकृति जहाज के स्वरूप में होनी चाहिए।
स्वस्तिधाम मंदिर समिति के वाइस प्रेसिडेंट धनराज जैन और मीडिया प्रभारी नेमीचंद जैन ने बताया कि जालोर जिले के एक छोटे जहाजनुमा जिनालय को आदर्श मानते हुए भव्य मंदिर निर्माण का कार्य शुरू किया गया। वर्ष 2016 में इसकी नींव रखी गई और चार वर्षों के के बाद 7 फरवरी 2020 को पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के साथ भगवान मुनिसुव्रतनाथ की प्रतिमा स्वर्णिम वेदिका पर विराजित की गई।
स्वस्तिधाम जिनालय की यह है प्रमुख विशेषताएं
यहां गर्भगृह का आकार 100×60 वर्गफीट है।सम्पूर्ण जिनालय का क्षेत्रफल 150×80 वर्गफीट में फैला हुआ है। मंदिर की आगे से तिकोनी आकृति और छत पर तीन शिखर इसे विशिष्ट बनाते हैं। छत पर 24 तीर्थंकरों की चौबीसी जिनालय की स्थापना की गई है। वहीं जिनालय के चारों ओर 8×5 फीट के जलकुंड बनाए गए हैं, जिनमें फव्वारे और विशेष लाइटिंग की व्यवस्था है, जिससे यह विशाल जहाज की भांति जल पर तैरता हुआ प्रतीत होता है।



