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Homeविधानसभा चुनाव 2023हर चुनाव में निर्दलीयों ने बिगाड़े कांग्रेस, बीजेपी के हार-जीत के समीकरण

हर चुनाव में निर्दलीयों ने बिगाड़े कांग्रेस, बीजेपी के हार-जीत के समीकरण

राजेन्द्र बागड़ी, वरिष्ठ पत्रकार

Deoli news. 13 नवम्बर ( दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) परिसीमन के बाद देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र के रिकॉर्ड को देखें तो हर बार राष्ट्रीय दलों के प्रत्याशियों के हार-जीत के समीकरणो को निर्दलीयों ने बिगाड़े है। ये रिकॉर्ड वर्ष 2008 से लेकर 2018 तक हुए विधानसभा चुनावों का है।

अबकी बार भी निर्दलीयों की संख्या कम नही है लिहाजा राष्ट्रीय दलों से खड़े पार्टी उम्मीदवारो के लिए बड़ी चुनौती है। विधानसभा चुनाव 2008 में कांग्रेस के रामनारायण मीणा को 40 फीसदी वोट मिले। जबकि बीजेपी के नाथूसिंह गुर्जर को 32 फीसदी वोट मिले। जबकि निर्दलीय तौर पर खड़े दिग्विजयसिंह अकेले 19 फीसदी वोट ले गए। जबकि कांग्रेस के रामनारायण मीणा व बीजेपी के नाथूसिंह के बीच हार का अंतर महज 8 फीसदी का रहा।

जबकि 26 फीसदी वोट उस समय के निर्दलीय ही ले गए। फिर वर्ष 2013 में हुए विधानसभा चुनावों का रिकॉर्ड देखे तो बीजेपी के राजेन्द्र गुर्जर को 53 फीसदी वोट मिले और कांग्रेस के रामनारायण मीणा को 35 फीसदी वोट ही मिले। दोनो उम्मीदवारों का अंतर देखे तो 18 फीसदी वोट का फर्क रहा। जबकि निर्दलीयों के वोट फीसदी देखे तो हरकचंद गोलछा समेत दो निर्दलीय ही 13 फीसदी वोट ले गए। यह आंकड़े कुछ महत्वपूर्ण निर्दलीय उम्मीदवारों के है। वर्ष 2018 में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के हरीश मीना को 51 फीसदी वोट मिले। जबकि बीजेपी के राजेन्द्र गुर्जर को 35 फीसदी वोट मिले।

दोनो का बीच हार-जीत का अंतर 22 फीसदी वोटों का रहा। जबकि निर्दलीय प्रत्याशी करीब 13 फीसदी वोट ले गए। ऐसे में बीते तीन चुनावों के समीकरणो का विश्लेषण करें तो जाहिर होता है कि निर्दलीय प्रत्याशी करीब 18 से 13 फीसदी वोट ले लेते है, जिनके कारण राष्ट्रीय दलों के एक प्रत्याशी की गणित बिगड़ जाती है और उन्हें हार का सामना करना पड़ता है। देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र में अबकी बार भी 9 प्रत्याशी निर्दलीय खड़े है। जिससे सभी दलों की वोटो की गणित गड़बड़ा रही है।

अबकी बार भी विधानसभा चुनावों में घमासान मचा है। कांग्रेस में भी कई बागी निर्दलीय खड़े है तो इस बार आम आदमी पार्टी व राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रत्याशी भी चुनावी मैदान में है। इनमें भी आरएलपी प्रत्याशी डॉ. विक्रम सिंह गुर्जर जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं। गुर्जर ने कांग्रेस से टिकट मांगा था। लेकिन टिकट नहीं बनने के बाद उन्होंने आरएलपी का दामन थामा तथा आरएलपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।

Dainik Bureau Desk
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