Monday, May 25, 2026
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HomeDainik Bureau Deskगुरु ने समझाया संयम और आत्म-कल्याण का महत्व

गुरु ने समझाया संयम और आत्म-कल्याण का महत्व

आचरण ही मोक्ष का मार्ग : आचार्य प्रसन्न सागर


Deoli News 19 फरवरी (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) शहर में बुधवार शाम जैन संतों के मंगल प्रवेश के बाद आचार्य प्रसन्न सागर महाराज के सानिध्य में आध्यात्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो गया है। गुरुवार शाम 4:30 बजे से तीन घंटे तक दीप आराधना का आयोजन हुआ।

जिसमें श्रद्धालुओं ने भक्ति के दीप प्रज्वलित किए। इसके बाद मूलनायक पार्श्वनाथ, विधिनायक व आदिनाथ भगवान की प्रतिमाओं पर मंत्रोच्चार के साथ अभिषेक एवं विश्व शांति की मंगल कामना के लिए शांतिधारा की गई। मंगल प्रवचनों के दौरान आचार्य ने जीवन के गूढ़ रहस्यों को साझा करते हुए कहा कि केवल किताबी ज्ञान से भवसागर पार नहीं किया जा सकता। जिस प्रकार तैरना सीखने के लिए नदी में उतरना पड़ता है, ठीक उसी प्रकार मोक्ष की प्राप्ति के लिए गुरु के आचरण को स्वयं के जीवन में उतारना अनिवार्य है। उन्होंने रिश्तों की नश्वरता और संसार के स्वार्थ पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि मनुष्य को बाहरी मोह-माया त्यागकर अपनी शाश्वत आत्मा के कल्याण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

समाज के मीडिया प्रभारी राजीव जैन ने बताया कि आचार्य ने यहां भोजन और अनुशासन पर चर्चा करते हुए गुरुदेव ने बताया कि एक बार भोजन करने वाला ही सच्चा योगी कहलाता है, जबकि बार-बार खाने की आदत केवल रोगों को जन्म देती है। उन्होंने गृहस्थों को समय की पाबंदी और मर्यादा का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि जहाँ दुनिया ‘अतिक्रमण’ यानी मर्यादा लांघने में व्यस्त है, वहीं साधु जीवन ‘प्रतिक्रमण’ यानी निरंतर अपनी गलतियों को सुधारने का नाम है। प्रवचन के बाद सम्पूर्ण श्रमण संघ की आहार चर्या हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रावकों ने आचार्य को आहार कराकर पुण्य अर्जित किया।

इससे पहले बुधवार शाम राजकीय महाविद्यालय के समीप से जैन मुनि संघ का मंगल प्रवेश हुआ। कई जगह पर उनका पाद प्रक्षालन किया गया। जुलूस के बाद उन्हें पटेल नगर स्थित पार्श्वनाथ मंदिर में लाया गया। 

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