Saturday, August 29, 2026
No menu items!
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img
HomeBjp"तीन नेताओं से चल रही है देवली की भाजपा’, पार्टी छोड़ने वाले...

“तीन नेताओं से चल रही है देवली की भाजपा’, पार्टी छोड़ने वाले पुराने कार्यकर्ता ने बताई नाराजगी की वजह

निकाय चुनाव से पहले भाजपा को झटका या टिकट की सियासत? तीन पुराने कार्यकर्ताओं के कांग्रेस जाने पर बहस शुरू

@आशीष बागड़ी


Deoli News 29 अगस्त (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) नगर निकाय चुनाव से कुछ दिन पहले भाजपा के तीन पुराने कार्यकर्ताओं के पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने के बाद देवली के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस घटनाक्रम को दोनों राजनीतिक दल अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं। भाजपा इसे संभावित रूप से टिकट नहीं मिलने की आशंका से जोड़कर देख रही है।

जबकि कांग्रेस इसे पार्टी की बढ़ती स्वीकार्यता और भाजपा के कुछ कार्यकर्ताओं में असंतोष का संकेत बता रही है। “दैनिक ब्यूरो” ने इस घटनाक्रम को लेकर भाजपा शहर मंडल अध्यक्ष, नगर कांग्रेस अध्यक्ष तथा भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए कार्यकर्ताओं से बातचीत की। भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए पुराने कार्यकर्ता राकेश ओसवाल ने कहा कि वह वर्ष 1993 से भाजपा से जुड़े रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में अब आम, वरिष्ठ और पुराने कार्यकर्ताओं को अपेक्षित महत्व नहीं मिल रहा है, जिससे कई पुराने कार्यकर्ता पार्टी से दूरी बना रहे हैं। ओसवाल के अनुसार, उन्होंने पूर्व में नगर पालिका चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ा था, लेकिन उस दौरान भी पार्टी की सदस्यता नहीं छोड़ी थी।

3 चुनिंदा नेताओं के इर्द-गिर्द है देवली की पार्टी

ओसवाल ने कहा कि उनके साथ कांग्रेस में शामिल हुए तीनों कार्यकर्ता पार्टी की कार्यशैली और कार्यकर्ताओं की कथित उपेक्षा से असंतुष्ट थे।

उन्होंने दावा किया कि देवली भाजपा की राजनीति कुछ चुनिंदा 3 नेताओं के इर्द-गिर्द केंद्रित हो गई है, जिसके कारण बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पार्टी से दूरी बना रहे हैं। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि टिकट वितरण के बाद कुछ और कार्यकर्ताओं में असंतोष सामने आ सकता है। भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए कार्यकर्ताओं में अलग-अलग सामाजिक वर्गों से जुड़े लोग हैं। राकेश ओसवाल वार्ड संख्या 22 से, तिलक जांगिड़ वार्ड संख्या 26 से तथा गोपाल टेलर वार्ड संख्या 15 से टिकट के इच्छुक बताए जा रहे थे। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि आगामी निकाय चुनाव में टिकट मिलने की संभावनाओं और कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर बनी परिस्थितियां उनके पार्टी छोड़ने के निर्णय के पीछे एक कारण हो सकती हैं। हालांकि, पार्टी छोड़ने वाले कार्यकर्ताओं ने अपने निर्णय को मुख्य रूप से कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और पार्टी की कार्यशैली से जोड़ा है।

“भाजपा में है सभी का सम्मान”

इस संबंध में भाजपा शहर मंडल अध्यक्ष अंकित जैन ने कहा कि प्रारंभिक रूप से ऐसा प्रतीत होता है कि पार्टी छोड़ने वाले कार्यकर्ताओं को संभवतः टिकट नहीं मिलने का आभास हुआ होगा।

जिसके कारण उन्होंने यह निर्णय लिया। जैन ने भाजपा में कार्यकर्ताओं की उपेक्षा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी में सभी कार्यकर्ताओं का सम्मान किया जाता है और किसी को जानबूझकर दरकिनार करने जैसी स्थिति नहीं है। उन्होंने पार्टी के उच्च पदाधिकारियों को इससे अवगत करा दिया है।

भाजपा में कार्यकर्ताओं की अहमियत नहीं, कांग्रेस में दावेदारों की कमी नहीं…

वहीं नगर कांग्रेस अध्यक्ष सौरभ जिंदल ने कहा कि भाजपा में कार्यकर्ताओं को पर्याप्त सम्मान नहीं मिलने के कारण कई लोग असंतुष्ट हैं और इसी कारण अन्य दलों के कार्यकर्ता कांग्रेस से जुड़ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस में प्रत्याशियों की कमी नहीं है और ऐसा नहीं है कि उक्त तीन वार्डों में उम्मीदवार नहीं मिलने के कारण भाजपा से आए कार्यकर्ताओं को टिकट देने की बात हो रही है। जिंदल के अनुसार, कांग्रेस में करीब 200 ऑनलाइन और 50 से अधिक ऑफलाइन आवेदन प्राप्त हुए हैं तथा अधिकांश वार्डों से तीन से पांच दावेदार सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में कार्यकर्ताओं को सम्मान और अवसर मिलने की भावना के कारण अन्य दलों से जुड़े लोग भी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर रहे हैं।

तो क्या और भी छोड़ सकते हैं पार्टी...

भाजपा से जुड़े कुछ सूत्रों के अनुसार, यदि टिकट वितरण और कार्यकर्ताओं की नाराजगी से जुड़े मुद्दों का समय रहते समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में कुछ और कार्यकर्ताओं के पार्टी बदलने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि देवली के आगामी नगर निकाय चुनाव में केवल भाजपा ही नहीं बल्कि कांग्रेस में भी टिकट के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है। दोनों प्रमुख दलों में 35 वार्डों के लिए बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त होने की चर्चा है। ऐसे में टिकट वितरण के बाद दोनों दलों में असंतुष्ट दावेदारों के सामने आने और निर्दलीय प्रत्याशियों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक समीकरणों पर नजर रखने वालों का कहना है कि यदि बड़ी संख्या में असंतुष्ट दावेदार निर्दलीय मैदान में उतरते हैं तो वे कई वार्डों में भाजपा और कांग्रेस दोनों के चुनावी गणित को प्रभावित कर सकते हैं।

फिलहाल भाजपा के तीन पुराने कार्यकर्ताओं का कांग्रेस में शामिल होना चुनावी माहौल में एक नई राजनीतिक चर्चा जरूर लेकर आया है, लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव टिकट वितरण और चुनाव मैदान में उम्मीदवारों की अंतिम सूची सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

देवली में तीन भाजपा कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल हुए

 

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here