देवली में भाजपा-कांग्रेस की चुनावी तैयारियां तेज, दोनों दलों के बड़े नेताओं के सामने अपनी राजनीतिक पकड़ साबित करने की चुनौती
Deoli News 26 अगस्त (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) देवली नगर पालिका चुनाव अब केवल वार्डों और प्रत्याशियों की लड़ाई नहीं रह गए हैं, बल्कि यह चुनाव भाजपा और कांग्रेस के प्रमुख नेताओं की राजनीतिक प्रतिष्ठा से भी जुड़ता नजर आ रहा है। एक ओर कांग्रेस के लिए टोंक-सवाई माधोपुर सांसद हरिश्चंद्र मीणा की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है, वहीं दूसरी ओर भाजपा की ओर से स्थानीय विधायक राजेंद्र गुर्जर के सामने अपनी राजनीतिक साख और देवली में पार्टी की मजबूत पकड़ साबित करने की चुनौती होगी।
नगर निकाय चुनाव की घोषणा और आचार संहिता लागू होने के बाद दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। मंगलवार को भाजपा ने देवली में निकाय कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित कर जहां चुनावी तैयारियों और टिकट चयन को लेकर मंथन किया, वहीं अब कांग्रेस ने भी गुरुवार को देवली में कार्यकर्ता बैठक बुलाकर चुनावी रणनीति पर चर्चा करने की तैयारी कर ली है। कांग्रेस की इस बैठक में सांसद हरिश्चंद्र मीणा स्वयं कार्यकर्ताओं और पार्षद पद के आवेदकों से संवाद करेंगे। इससे पहले भी सांसद हरिश्चंद्र कांग्रेस कार्यालय में कार्यकर्ताओं से चुनावी मंथन कर चुके हैं। एक बार फिर वे देवली आ रहे हैं। अलबत्ता राजनीतिक दृष्टि से देवली का नगर पालिका चुनाव इस बार काफी रोचक माना जा रहा है। भाजपा विधायक राजेंद्र गुर्जर ने कार्यकर्ता सम्मेलन में स्पष्ट रूप से देवली नगर पालिका में भाजपा का बोर्ड बनने का दावा किया है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं को सभी 35 वार्डों में एकजुट होकर चुनाव लड़ने और पार्टी प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने का आह्वान किया। ऐसे में चुनाव परिणाम भाजपा के दावे और विधायक गुर्जर की स्थानीय राजनीतिक पकड़ की भी परीक्षा होंगे। विधायक गुर्जर ने उपचुनाव में मिली पांच हजार से अधिक मतों की जीत का उल्लेख करते हुए कार्यकर्ताओं से उसी उत्साह और एकजुटता के साथ नगर निकाय चुनाव लड़ने की अपील की है। भाजपा का दावा है कि विधायक के नेतृत्व और ट्रिपल इंजन सरकार के विकास कार्यों के आधार पर पार्टी देवली में अपना बोर्ड बनाने में सफल होगी। यदि भाजपा का प्रदर्शन उम्मीद के अनुरूप रहता है तो यह विधायक गुर्जर की राजनीतिक स्थिति को और मजबूत करेगा, वहीं अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर विपक्ष को सवाल उठाने का अवसर भी मिलेगा। उल्लेखनीय है कि निवर्तमान नगर पालिका बोर्ड कांग्रेस और बीजेपी दोनों कार्यकाल में रह चुका है। शुरुआत में यह बोर्ड कांग्रेस से बना था, जो बाद में पार्टी बदलने से बीजेपी में तब्दील हो गया था।
दूसरी ओर कांग्रेस के लिए भी यह चुनाव कम महत्वपूर्ण नहीं है। सांसद हरिश्चंद्र मीणा के देवली पहुंचकर कार्यकर्ताओं और पार्षद पद के आवेदकों से सीधे संवाद करने से स्पष्ट है कि पार्टी इस चुनाव को गंभीरता से ले रही है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को एकजुट करने, मजबूत उम्मीदवारों के चयन और वार्ड स्तर पर संगठन को सक्रिय करने की जिम्मेदारी पार्टी नेतृत्व के सामने होगी। सांसद हरिश्चंद्र की लोकसभा क्षेत्र में राजनीतिक पकड़ और कांग्रेस संगठन की मजबूती का असर भी देवली नगर पालिका चुनाव में दिखाई देगा। ऐसे में कांग्रेस का प्रदर्शन सांसद की प्रतिष्ठा से भी जुड़ गया है। कांग्रेस यदि भाजपा को कड़ी चुनौती देती है या नगर पालिका में बेहतर स्थिति बनाती है तो इसे सांसद की राजनीतिक सक्रियता और संगठनात्मक पकड़ के रूप में देखा जाएगा। इधर, भाजपा के कार्यकर्ता सम्मेलन में 35 वार्डों के लिए करीब 175 आवेदन आने से पार्टी के भीतर टिकट की दावेदारी भी जोर पकड़ चुकी है। कांग्रेस में भी कार्यकर्ता बैठक के बाद पार्षद पद के संभावित उम्मीदवारों की सक्रियता बढ़ने की संभावना है। इस बार कांग्रेस के आवेदन ऑनलाइन भी लिए जा रहे हैं। दोनों दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती टिकट वितरण के दौरान असंतोष को नियंत्रित करते हुए सभी गुटों और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखना होगी। कुल मिलाकर देवली नगर पालिका चुनाव में मुकाबला केवल भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के बीच नहीं होगा।
चुनाव परिणाम यह भी तय करेंगे कि देवली में किस दल की संगठनात्मक ताकत अधिक मजबूत है और किस नेता की राजनीतिक पकड़ जनता के बीच ज्यादा प्रभावी है। यही कारण है कि इस बार का निकाय चुनाव सांसद हरिश्चंद्र मीणा और विधायक राजेंद्र गुर्जर, दोनों के लिए प्रतिष्ठा और साख की बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। तो क्या इस बार मुकाबला सांसद और विधायक की राजनीतिक पकड़ के बीच होगा?



