Deoli News 27 सितंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) क्षमा वाणी पर्व पर मुनि सुप्रभ सागर महाराज ने कहा कि अपनी गलती स्वीकार करना साहस का कार्य है। गलती होने पर क्षमा मांगने और दूसरों की गलती को क्षमा करने वाला ही सच्चा वीर कहलाता है।
क्षमा कायरता नहीं, बल्कि वीरता का प्रतीक है। उत्तम क्षमा धारण करने वाला व्यक्ति पूजनीय बन जाता है। क्षमा ऐसा अस्त्र है, जिससे बिना चोट पहुंचाए शत्रु को भी जीता जा सकता है। क्षमा केवल वाणी में नहीं, बल्कि अंतरंग भावों में भी होनी चाहिए। मुनि वैराग्य सागर जी महाराज ने कहा कि भूल-चूक और गलतियां होना मानवीय स्वभाव है, लेकिन उन्हें स्वीकार करने वाला ही उत्तम क्षमा का धारी बन सकता है। क्रोध कई भव बिगाड़ देता है, जबकि क्षमा से गुणों की प्राप्ति होती है। क्षमा भाव धारण करने वाला प्रत्येक प्राणी के प्रति मैत्री भाव रखता है। आचार्यों ने क्षमादान को महादान बताया है।
हमें संसार के सभी प्राणियों के प्रति क्षमाभाव रखना चाहिए। इस उत्तम क्षमा के दिन जैन समाज के लोगों ने सालभर की हुई भूल चूक, गलती के लिए लोगों क्षमा याचना की। वही जैन मंदिरों में कई कार्यक्रम हुए। जैन संतों ने लोगों को मार्गदर्शन दिया। वही दशलक्षण पर्व के महत्व की जानकारी दी।


