Deoli News 26 अक्टूबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) शरद पूर्णिमा के अवसर पर रविवार रात शहर व ग्रामीण क्षेत्रों के विभिन्न मंदिरों में धार्मिक आयोजन हुए। मंदिरों में खीर बनाकर रात 9 बजे से 12 बजे के बीच चंद्रमा की रोशनी में रखी गई।
वहीं मध्यरात्रि 12 बजे के बाद ठाकुरजी को खीर का भोग लगाकर श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में वितरण किया गया। इस दौरान कई स्थानों पर भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित हुए। शहर के अग्रवाल विश्राम गृह में विराजमान श्री चारभुजानाथ ठाकुरजी की विशेष श्रृंगार झांकी सजाई गई। अनुज पुजारी ने बताया कि ठाकुरजी को सफेद पोशाक धारण कराई गई तथा सफेद और हल्के हरे रंग के पुष्पों से आकर्षक श्रृंगार किया गया। इसी तरह देवली के नीलकंठ महादेव मंदिर परिसर में भी शरद पूर्णिमा के अवसर पर खीर बनाई गई। इस दौरान ट्रस्ट के संजय भारद्वाज, सुनील कुमावत, टीकम सेन और रिंकू पाराशर ने खीर तैयार की।
खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखने के बाद ठाकुरजी को भोग लगाया गया और श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया। शहर के कुछ स्थानों पर रात्रि में भजन संध्या का आयोजन हुआ। वहीं कई मंदिरों में दोपहर के समय महिलाओं ने एकत्रित होकर ठाकुरजी के भजन गाए। घरों में भी श्रद्धालुओं ने खीर बनाकर ठाकुरजी और अपने लड्डू गोपाल को भोग लगाया तथा परिवार के सदस्यों में प्रसाद वितरित किया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर दर्शन देते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणों में अमृतमयी और स्वास्थ्यवर्धक गुण होते हैं। इसी विश्वास के चलते लोग खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखते हैं और बाद में प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।


