ओपीडी इलाज के दौरान चिकित्सीय पर्ची के संबंध में जारी निर्देश
Desk News 31 अगस्त (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना (आरजीएचएस) के तहत ओपीडी इलाज में हो रही अनियमितताओं को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। इसे लेकर सभी मेडिकल कॉलेज एवं स्वास्थ्य संस्थानों के प्रमुखों को पत्र लिखा गया।
दरअसल ऑडिट और जांच में सामने आए फर्जीवाड़े और राजकीय राशि के दुरुपयोग के मामलों के बाद यह कदम उठाया गया है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ के निर्देशों के मुताबिक, अब डॉक्टर बिना जांच और क्लिनिकल परीक्षण के किसी अन्य चिकित्सक के पर्चे का इस्तेमाल कर सरकारी पर्ची नहीं बना सकेंगे। ओपीडी पर्ची में मरीज के लक्षण, बीमारी का इतिहास और लैब रिपोर्ट का संक्षिप्त विवरण अनिवार्य रूप से दर्ज करना होगा।
इसके अलावा एक ही परिवार के कई सदस्यों को एक ही दिन में एक ही तरह की बीमारी व उनकी महंगी दवाएं लिखने पर भी रोक लगाई गई है। पूर्व में जांच में यह भी पाया गया कि सीएचसी, पीएचसी में संविदा पर काम कर रहे चिकित्सक और डेटा एंट्री ऑपरेटर बिना चिकित्सकीय जांच के पर्ची जारी कर रहे थे, जिसके आधार पर मेडिकल स्टोर और लाभार्थी मिलकर फर्जी बिलों के जरिए भुगतान उठा रहे थे। ऐसे मामलों पर विशेष निगरानी रखने और फील्ड निरीक्षण के दौरान इसकी जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने पिछले दो सालों की ओपीडी पर्चियों का ऑडिट कराने का भी फैसला किया है, ताकि दोषियों पर कार्रवाई की जा सके।
साथ ही पेंशनर्स द्वारा वित्तीय वर्ष के अंतिम तीन महीनों में 50 हजार रुपए की वार्षिक सीमा पूरी करने के लिए अधिक दवाएं और जांच कराने की प्रवृत्ति पर भी अंकुश लगाने को कहा गया है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने अधीनस्थ चिकित्सा अधिकारियों को इन नियमों के बारे में अवगत कराएं और कार्यशालाएं आयोजित कर उन्हें संवेदनशील बनाएं।



