धर्म सभा में संस्कार को महत्वपूर्ण बताया
Deoli News 4 अप्रैल (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) मां की कोख से जन्म बाद तक मिले संस्कारों से आत्मा भी परमात्मा बन सकती है। भगवान का रूप ही तीन लोक में सभी जीवों का कल्याण के लिए होता है।
यह बात मुनि सुप्रभ सागर ने शहर के कुंचलवाड़ा रोड जैन कॉलोनी में चल रहे लघु पंचकल्याण एवं नवीन वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव के गर्भ एवं जन्मकल्याणक महोत्सव की धर्मसभा में कही। उन्होंने कहा कि जन्म के साथ संतान को संस्कारित करना महत्वपूर्ण है। संस्कार देने में माताओं का बड़ा हाथ होता है।आज की माताएं संतान चाहती है, एक संतान पैदा करना है तो तीर्थंकर भगवान की तरह बने, ताकि वह जगत का कल्याण करें।
धन के कारण संताने संसार व संस्कार को भूल रहा है। जबकि संस्कार के माध्यम से ही जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है। आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ने जन्मकल्याणक भगवान का मनाया जाता है। जबकि जयंती महापुरुषों की मनाई जाती है। लेकिन आज जन्मदिन पर दीपक बुझाने की गलत परंपरा चल रही है। लिहाजा आवश्यकता है जन्मदिन पर भगवान की साधना,भक्ति से मनाए और गुरुओं का आशिर्वाद लेना चाहिए।

अनंत पापों का नाश भक्ति के माध्यम से हो जाता है। पंचकल्याण में गुरुवार रात को महाआरती, शास्त्र प्रवचन, सौधर्म सभा, कुबेर द्वारा नगरी की रचना, सोलह स्वप्न, माताजी का श्रृंगार, अष्टकुमारियो के मां की सेवा आदि कार्यक्रम हुए है। जबकि शुक्रवार को जन्म कल्याणक में प्रातःजाप, आराधना, अभिषेक, शांतिधारा, नित्य पूजन, गर्भ कल्याणक की पूजन, तीर्थंकर बालक का जन्म व जन्मोत्सव, बधाईयां, सौधर्म इंद्र को शच्ची इंद्राणी द्वारा प्रथम दर्शन, मुनि की दिव्य देशना, इंद्राणी को प्रथम दर्शन, जन्मकल्याणक जुलूस, पांडुशिला का जन्म अभिषेक की क्रियाएं हुई।
वही दोपहर में तीर्थंकर बालक पारस कुमार का श्रृंगार किया गया। शाम को आरती, शास्त्रसभा, रात्रि को आनंदोत्सव, बालक को पालना व बाल क्रीड़ा की जाएगी।


