Deoli News 11 नवम्बर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) दीपावली के मौके पर श्रीमहालक्ष्मी पूजन प्रदोष युक्त अमावस्या को स्थिर लग्न व स्थिर नवमांश में किया जाना श्रेष्ठ होता हैं। इस वर्ष कार्तिक कृष्णा अमावस्या 12 नवम्बर रविवार को दोपहर 2.45 बजे से शुरू है।
जो 13 नवम्बर सोमवार को दोपहर 2.57 बजे तक रहेंगी। ऐसे में 12 नवम्बर रविवार को प्रदोष व्यापिनी अमावस्या होने से इसी दिन दीपावली मनाई जाकर लक्ष्मी पूजन किया जाएगा। जिसमें सूर्यास्त 5.34 से रात्रि 8.08 बजे तक प्रदोष काल है। वृष लग्न रात्रि 5.48 बजे से 7.45 बजे तक है। जिसमें कुम्भ का नवमांश रात्रि 6.01 बजे से 6.13 तक रहेगा, जो श्रेष्ठ समय है। मनु ज्योतिष व वास्तु शोध संस्थान टोंक के निदेशक बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि निशिथ काल अर्धरात्रि 23.45 बजे से 24.37 बजे तक सिंह लग्न अर्धरात्रि 24.18 से अन्तरात्रि 26.34 तक श्रेष्ठ है।
पूजन का श्रेष्ठ समय चौघडिय़ा अनुसार सांयकाल 5.34 से रात्रि 10.34 तक शुभ अमृत चर के अर्धरात्रि बाद लाभ का 1.50 बजे से 3.29 तक अन्तरात्रि 05.08 बजे से 06.48 बजे तक शुभ का चौघडिय़ा रहेगा। दिवाकाल में चौघडिय़ा अनुसार चर लाभ अमृत के सुबह 8.08 बजे से दिन में 12.11 बजे तक अभिजीत मुहूर्त दिन में 11.47 से 12.33 बजे तक रहेगा। शुभ का दोपहर 1.31 बजे से 2.51 बजे तक रहेगा। व्यापारी वर्ग के लिए धनु लग्न सुबह 9.26 से 11.30 तक व कुम्भ लग्न दोपहर 1.14 बजे से 2.44 बजे तक है।



