Deoli News 22 नवंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) देवउठनी एकादशी इस बार 23 नवंबर को मनाई जाएगी। शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु 5 माह की निद्रा के बाद जागेंगे। इसके बाद से एक बार फिर सब सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।

देवली व ग्रामीण क्षेत्र में भी दर्जनों शादी विवाह है। इस दिन लोग घरों में भगवान सत्यनारायण की कथा और तुलसी-शालिग्राम के विवाह का आयोजन करते हैं। माना जाता है कि देवउठनी एकादशी को भगवान श्रीहरि 5 माह की गहरी निद्रा से उठते हैं। भगवान के सोकर उठने की खुशी में देवोत्थान एकादशी मनाई जाती है। इसी दिन मां तुलसी से उनका विवाह हुआ था। इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं। शास्त्र की परम्परानुसार देव देवउठनी एकादशी में तुलसी जी विवाह किया जाता है। इस दिन उनका श्रंगार कर उन्हें चुनरी ओढ़ाई जाती है और परिक्रमा की जाती है। रात्रि को विधिवत पूजन के बाद प्रात:काल भगवान को शंख, घंटा आदि बजाकर जगाया जाएगा।
और पूजा करके कथा सुनी जाएगी। इस मौके पर भगवान विष्णु की कपूर से आरती करने का विधान है। यह पुण्यदायी माना जाता है। देवउठनी एकादशी के साथ ही शादी, विवाह, सगाई, उद्घाटन, शिलान्यास, भूमि पूजन, गृह प्रवेश सहित मांगलिक कार्य फिर से शुरू होंगे। गुरुवार से एक बार फिर शहर में शहनाइयां गूंज उठेगी।



