जहाजपुर के लिए किया विहार
Deoli News 29 जनवरी (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) मुनि अनुपम सागर व मुनि यतीन्द्र सागर ने बुधवार को दान की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि प्रत्येक श्रावक को दान करना चाहिए। दान चार प्रकार के बताए गए। इनमें आहार दान, औषध दान, ज्ञान दान, अभय दान है। इनमें भी सर्वश्रेष्ठ आहार दान को महत्व दिया गया है।

श्रावक के आवश्यक कर्तव्यों में से साधु को आहार दान देना भी आवश्यक है। ओमप्रकाश जैन ने बताया कि मुनि ने जीवन जीने की कला व क्रोध पर नियंत्रण की विधि भी सिखाई। मुनि ने क्रोध के लक्षण बताते हुए बताया कि भुख न लगना, नशा करना, अपशब्दों का प्रयोग करना, बड़बड़ करना, नजरें न मिलाना, अकेलापन महसूस करना, अभक्ष्य पदार्थो का सेवन करना, उपेक्षा करना जैसे कई विकार है, जो मनुष्य के क्रोध का निमित्त बनते है और इसी क्रोध में मनुष्य अपने गृह क्लेश का कारण बनता है। घर की शांतिभंग करने के निमित बनते है। लिहाजा हमें सदैव शुद्ध शाकाहरी भोजन करना चाहिए। क्रोध आने पर पहले 2 मिनट सोचकर फिर प्रतिक्रिया देनी चाहिए।
जिद पर नही अड़ना चाहिए। वहीं सोने का समय निर्धारित होना चाहिए। प्रतिदिन रात 10 बजे तक सोने का एवं सुबह 5.30 तक हर सम्भव उठ जाना चाहिए। यही सर्वश्रेष्ठ समय होता है। बुधवार को यह प्रवचन महावीर मन्दिर गांधी पार्क के पास हुए। युवा परिषद प्रवक्ता विकास जैन (टोरडी) ने बताया कि मुनि संघ के सानिध्य में मंगलवार शाम भगवान आदिनाथ स्वामी के मोक्ष कल्याणक दिवस पर संगीतमय भक्तामर स्त्रोत का पाठ महाआरती का आयोजन पार्श्वनाथ धर्मशाला में हुआ। मुनि संघ ने अपरान्ह 3 बजे देवली से जहाजपुर के लिए विहार किया। मुनियों ने समाज को एकता के सूत्र में पिरोए रखने की बात कही और कहा कि संत आते है, चले जाते है। लेकिन समाज को सदैव एक मुठी की भांति बंधे हुए रहना चाहिए। बुधवार को मुनि यतीन्द्र सागर का आहार विवेकानंद कॉलोनी स्थित निहालचंद सेठी के यहां हुआ। जबकि मुनि अनुपम सागर का आहार मनोज अजमेरा के यहां हुआ।



