“चाय दिवस पर खास खबर”
@आशीष बागड़ी
Deoli News 21 मई (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) आज 21 मई है, जिसे पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस के रूप में मनाती है। यह दिन उन लोगों के लिए किसी बड़े त्योहार से कम नहीं है जिनकी आँखों की चमक सुबह की पहली चाय के साथ जगती है और जिनकी रात की आखिरी थकान चाय की अंतिम चुस्की के साथ विदा होती है।
देवली शहर की बात करें तो यहाँ चाय अब महज एक पेय पदार्थ नहीं रह गई है, बल्कि यह एक अहसास और सामाजिक मेलजोल का सबसे बड़ा जरिया बन चुकी है। हर आम और खास के सम्मान में चाय पेश की जाती है। शहर के गली-कूचों से लेकर मुख्य चौराहों तक, चाय की महक यहाँ के लोगों के मिजाज में घुली हुई है। पिछले एक दशक में देवली के चाय व्यापार ने जो रफ्तार पकड़ी है, उसने व्यापार के पुराने मायनों को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। देवली में रोडवेज बस स्टैंड परिसर स्थित ‘पारस चाय वाला’ यानी मोंटी की दुकान भी एक शहर में चाय खास ठिकाना है।
जहाँ दिन के उजाले में बस स्टैंड पर आने-जाने वाले हजारों यात्री अपनी यात्रा की थकान मिटाते हैं, वहीं सूरज ढलते ही यहाँ का नजारा एकदम बदल जाता है। आसपास की चाय की दुकानों पर भी रात के वक्त यहाँ शहर के लोगों से लेकर युवाओं तक की टोली जुटती है, जहाँ राजनीति से लेकर घर-परिवार तक की ‘हजार बातों’ का दौर चाय की चुस्कियों के साथ चलता है। चाय का यह सफर यहीं खत्म नहीं होता, शहर के चुंगी नाका पर स्थित ‘ज्योति टी स्टॉल’ का जिक्र किए बिना देवली की चाय चर्चा अधूरी है। यहाँ शेखर जैन की चाय के दीवाने युवाओं, कर्मचारियों और मेहनतकश मजदूरों की भारी तादाद है। शेखर चाय वाले का नाम आते ही युवाओं के चेहरे पर मुस्कान और गप्पें लड़ाने की इच्छा जाग जाती है। यहां तक की आजकल राजनीतिक चर्चाएं भी चाय के चुस्कियों के साथ चर्चा का केंद्र बनती है। कई बार राजनीतिक हवा जांचने के लिए बड़े नेता भी आम चाय की स्टाल पर रुककर चाय का लुत्फ उठाते हैं। जिससे कि उन्हें जमीनी हवा का पता लग सके।

कांच के गिलास में चाय पीने का मजा है अलग
इस स्टॉल की सबसे खास बात यह है कि यहाँ आज भी आधुनिक डिस्पोजल गिलासों के साथ-साथ परंपरागत कांच के गिलासों में चाय परोसी जाती है, जो चाय पीने के उस पुराने और असली अंदाज़ को जिंदा रखे हुए है। कांच के गिलास की खनक और कड़क चाय का मेल यहाँ आने वाले हर शख्स को अपना मुरीद बना लेता है। इसी तरह एलआईसी ऑफिस के पास चर्च रोड पर स्थित पंडित जी की चाय का भी अपना एक अलग ही रुतबा है। यहाँ के दुकानदार और कर्मचारी पंडित जी की चाय के इतने कायल हैं कि दिन में कई बार काम के बीच छोटा सा ब्रेक लेकर यहाँ चाय का लुत्फ उठाना अपनी दिनचर्या का हिस्सा मानते हैं। यहां भी कांच के गिलास में चाय परोसी जाती है।
पिछले दस सालों में देवली के चाय बाजार का न केवल विस्तार हुआ है, बल्कि इसमें आधुनिकता का समावेश भी हुआ है। पिछले दो-तीन वर्षों में शहर में नामी कंपनियों की फ्रेंचाइजी ने भी दस्तक दी है, जहाँ अब अदरक, पुदीना, तुलसी और इलायची जैसे विभिन्न स्वादों वाली प्रीमियम चाय उपलब्ध है। यह इस बात का प्रमाण है कि देवली के लोगों का स्वाद अब ग्लोबल हो रहा है। समय के साथ चाय ने न केवल अपना स्वाद बदला है, बल्कि अपनी सेवा का तरीका भी बदला है।
एक कॉल पर चाय की डिलीवरी
आज के डिजिटल दौर में देवली में ‘एक कॉल पर चाय’ की सुविधा ने चाय प्रेमियों को बड़ी राहत दी है। शहर के अलग-अलग कोनों में अब ऐसे विक्रेता सक्रिय हैं, जो फोन आते ही गरमा-गरम चाय की डिलीवरी सीधे दुकानों और घरों तक पहुँचा देते हैं। घरों में भी अब चाय सुबह और दोपहर के भोजन की तरह एक अनिवार्य अंग बन गई है। हालांकि चाय का अत्यधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, लेकिन देवली के चाय प्रेमियों के लिए यह स्वास्थ्य से ज्यादा भावनाओं और जुड़ाव का मामला है। यहाँ के लोगों के लिए चाय सिर्फ मन की प्यास बुझाने का साधन नहीं, बल्कि रिश्तों को गरमाहट देने का एक खूबसूरत माध्यम है।



