Deoli News 7 जून (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) शहर के अटल उद्यान में चल रहे 15 दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ में महामंडलेश्वर दिव्य मुरारी बापू ने कहा कि मनुष्य जीवन भर पद की लालसा में रहता है और पद से हटते ही वह ‘भूतपूर्व’ कहलाने लगता है।
जबकि इसके विपरीत, भक्त और भगवान कभी कोई सांसारिक पद ग्रहण नहीं करते, लिहाजा उन्हें कभी भी भूतपूर्व नहीं बनना पड़ता। वे सदैव वर्तमान और शाश्वत रहते हैं। बापू ने श्रीरामचरितमानस में वर्णित विभिन्न कल्पों की कथाओं का सार बताते हुए कहा कि भगवान श्री राम का अवतार केवल दुष्टों का संहार करने के लिए ही नहीं, बल्कि शबरी, केवट और अहिल्या जैसे भक्तों का उद्धार करने के लिए होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मनुष्य को कभी भी किसी की खराब परिस्थितियों का उपहास नहीं करना चाहिए।
बल्कि संकट में पड़े व्यक्ति को संभालने का प्रयास करना चाहिए। कथा के दौरान बापू ने समझाया कि भगवान निराकार हैं, लेकिन भक्त के प्रेम और भाव के अनुसार वे सगुण-साकार रूप में प्रकट होते हैं। जिस प्रकार सूर्य अपनी रोशनी के लिए कोई शुल्क नहीं लेता, उसी प्रकार भगवान भी अपने भक्तों पर असीम कृपा बरसाते हैं और उनकी भक्ति का कोई मूल्य नहीं आंकते। उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि मंदिर में प्रवेश करते समय मन में शुद्ध भाव रखें और हमेशा सतर्क रहें, क्योंकि भगवान हर परिस्थिति में अपने भक्तों के साथ रहते हैं।



