Deoli News 9 जून (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) शहर के अटल उद्यान स्थित टीनशेड में चल रही 15 दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा में सोमवार रात महामंडलेश्वर दिव्य मुरारी बापू ने कहा कि धर्म, सत्कर्म और आध्यात्मिक विद्या के बिना मनुष्य का जीवन व्यर्थ है।
उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों को प्रकट करते हुए कहा कि मनुष्य को पशुओं से भिन्न उसकी धार्मिकता, कर्मठता और ज्ञान ही बनाता है। इन गुणों के अभाव में मनुष्य और अन्य जीव समान हैं। कथा के दौरान बापू ने प्रभु श्रीराम की बाल लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कौशल्या माता को भगवान द्वारा दिए गए विराट स्वरूप के दर्शन और भगवान द्वारा प्रसाद ग्रहण करने की लीला को भक्ति का प्रतीक बताया। बापू ने महाराज दशरथ को ज्ञान और माता कौशल्या को भक्ति स्वरूप बताते हुए कहा कि ईश्वर को केवल भक्ति ही अपनी गोद में बैठा सकती है, साधक को समस्त साधनों से ऊपर भक्ति को प्राथमिकता देनी चाहिए।
प्रभु श्रीराम के यज्ञोपवीत संस्कार और गुरुकुल में विद्या अध्ययन की लीला पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान ने स्वयं विद्या ग्रहण कर जगत को यह संदेश दिया है कि जीवन में ज्ञान प्राप्त करना अत्यंत आवश्यक है।


