दोपहर तक हालात होंगे पूरी तरह साफ, बहुमत में निर्दलीयों की भूमिका रहेगी
@राजेन्द्र बागड़ी
Deoli News 13 सितंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) शहर की सरकार किसकी बनेगी! बहुमत मिलेगा या किसी भी दल को बहुमत नही मिलेगा! इन सब सवालों के जवाब ईवीएम मशीन उगलेगी। यदि बहुमत के करीब रहे तो निर्दलीयों की भूमिका अहम हो जाएगी, ऐसे में भी कई सवाल ऐसे है कि किसके खेमे में जिताऊ निर्दलियो की संख्या है। यदि नही है तो कैसे जुटाए जाएंगे, ये सब उलझनें अभी बाकी है।

दरअसल 14 सितंबर वह तारीख है, जो शहर के लिए, दलों के लिए महत्वपूर्ण है। मतगणना सुबह 8 बजे शुरू होगी और 12 चरणों मे होगी यानि हर चरण में तीन वार्डो के परिणाम सामने आएंगे।शहर में 35 वार्ड है लिहाजा 12 चरणों मे 35 वार्डो के चुनाव परिणाम आएंगे। मतगणना की प्रक्रिया लगभग 20 से 25 मिनट एक चरण के लिए पूरी होगी। यानि 35 वार्डो के पूरे चुनाव परिणाम दोपहर तक आएंगे। जो प्रत्याशी जीतेंगे सिकन्दर कहलायेंगे ओर जो हार गए या कम अंतर से पीछे रहेंगे, उनके लिए हमेशा मलाल रहेगा। खासकर वो निर्दलीय जो दोनों दलों को बाईपास कर निर्वाचित होंगे, उनके लिए जीवन का अहम पल होगा। उनकी अहमियत दलों से जीतकर आए उम्मीदवार से ज़्यादा महत्वपूर्ण होगी। दलों की स्थिति देखे तो बीजेपी 35 वार्डो से कांग्रेस 34 वार्डो से चुनाव लड़ी है।
कांग्रेस के एक प्रत्याशी का नामांकन रद्द होने से कांग्रेस को आखरी वक्त पर निर्दलीय प्रत्याशी को समर्थन करना पड़ा। दोनों दलों के बीच 3 या 4 स्थानों पर सीधी टक्कर रही है जबकि बाकी स्थानों पर बहु कोणीय मुकाबले है। लिहाजा अनुमान है कि निर्दलीयों की बड़ी संख्या दोनों दलों का खेल बिगाडेंगी। शहर के मिजाज को देखकर कहा जा सकता है कि किसी भी दल को बहुमत नही मिलेगा। ताजा सूचनाओं के मुताबिक ज्यादा निर्दलीयों की संख्या बीजेपी के पास बताई जा रही है। वह सवाल अलग है कि उनके जीतने वाले उम्मीदवार कितने है। हालांकि कांग्रेस भी पूरी कोशिश में है कि वह भी पार्टी का बोर्ड बनाए, लेकिन ये तब सम्भव होगा।

जब कांग्रेस की सीटें बीजेपी से अधिक आए और 18 के आंकड़े को छूने के लिए पर्याप्त निर्दलीयों की संख्या पास हो। यदि बीजेपी पिछड़ी तो निर्दलीयों की संख्या जुटाना बड़ी चुनौती होगी ठीक यही हालत कांग्रेस के लिए भी हो सकती है। एक स्थिति ये भी सम्भव है कि दोनों ही दल निर्दलीयों के बावजूद बहुमत जितना आंकड़ा प्राप्त नही कर पाए तो बात रोमांचक हो सकती है। पूरे निर्दलीय किसी दल के पास नही है, कुछ किसी दल के खेमे में है तो कुछ किसी ओर के साथ है। कुछ निर्दलीय भी अकेले खुद बाड़ेबंदी में है, जो दोनों दलों की गणित को उलझा सकते है। ऐसी हालत में बड़े सौदों के साथ राजनीतिक समझौतों की सम्भावनाएं बढ़ेगी। शहर में आज का दिन चर्चाओं का है कल बहुमत के लिए उठापटक रहेगा। सबसे खास बात ये रहेगी कि दोनों दल 35 में से कितनी-कितनी संख्या अपने बलबूते पर प्राप्त कर पाते है। ये दोनों दलों की अग्निपरीक्षा भी होगी। टिकट का चयन, उम्मीदवार की कसौटी साबित करेगी।
शहर में विधायक राजेन्द्र गुर्जर व सांसद हरीश मीणा की भी प्रतिष्ठा लगी रहेगी। दोनों नेताओं का राजनैतिक कौशल क्या रहेगा। दोनों दलों की जीत का प्रतिशत कितना रहा और किसका कद बढ़ा और किसका घटा, जनता तोल करेगी। राजनीति में सब चलता है, इस बात का भी पता चलेगा।


