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आखिर क्यों चुनी गईं “कजोड़ी देवी”? भाजपा के फैसले के पीछे ये समीकरण आए सामने


Deoli News 17 सितंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) नगर पालिका चुनाव में 17 वार्ड जीतने के बाद निर्दलीय पार्षद मुकेश कुमार के भाजपा में शामिल होने से बहुमत का आंकड़ा 18 तक पहुंच गया। अब भाजपा ने अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित पालिकाध्यक्ष पद के लिए वार्ड नंबर 9 से निर्वाचित पार्षद कजोड़ी देवी को अपना प्रत्याशी बनाया है।

वार्ड 9 भी अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित था और कजोड़ी देवी भाजपा के टिकट पर चुनाव जीती हैं। कजोड़ी देवी के नाम के चयन को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इसके पीछे उनके पति तनसुख बैरवा की लंबे समय से सक्रिय नगर पालिका शिग5 राजनीतिक भूमिका भी एक महत्वपूर्ण पहलू रही। तनसुख बैरवा भाजपा के पुराने कार्यकर्ता रहे हैं और नगर पालिका की राजनीति में भी सक्रिय रहे हैं। वे कई बार पार्षद रह चुके हैं और एक बार पालिका उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। लिहाजा अनुभव पुराना है। स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच चर्चा के अनुसार तनसुख बैरवा का शहर में सामाजिक संपर्क और विभिन्न वर्गों के लोगों के साथ जुड़ाव भी कजोड़ी देवी के पक्ष में महत्वपूर्ण माना गया।

निर्माण व्यवसाय से जुड़े होने के कारण उनका शहर, बाजार और आसपास के क्षेत्र में व्यापक संपर्क भी बताया जाता है। वहीं इस बार भाजपा से निर्वाचित अधिकांश पार्षद नगर पालिका की राजनीति में नए चेहरे हैं। ऐसे में अनुभवी राजनीतिक परिवार से आने वाली कजोड़ी देवी के नाम पर पार्टी का भरोसा जताना संगठनात्मक अनुभव और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। एक अन्य चर्चा यह भी है कि भाजपा के सामने दावेदारों के चयन में केवल सामाजिक वर्ग और पार्षद के रूप में जीत ही आधार नहीं रही, बल्कि स्थानीय संगठनात्मक समीकरण भी महत्वपूर्ण रहे। पार्टी से निर्वाचित कुछ पार्षदों को एक पक्ष से जुड़ा हुआ माना जा रहा था। वहीं इसमें अधिकतर नए थे। ऐसे में पार्टी के सामने ऐसा नाम चुनने की जरूरत भी महसूस की गई। हालांकि बहुमत के बाद भी चयन को लेकर पार्टी में काफी पेशोपेश की स्थित रही। इसकी वजह भीतरी राजनीतिक द्वंद भी है।

इसी समीकरण में कजोड़ी देवी का नाम अन्य संभावित विकल्पों पर आगे आया माना जा रहा है।  अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने के कारण इस वर्ग से कई दावेदारों की चर्चा थी। वार्ड 29 से निर्दलीय जीतने वाले मुकेश कुमार भी एससी वर्ग से हैं। चुनाव परिणाम के बाद उनके भाजपा में शामिल होने से पार्टी के पार्षदों की संख्या 18 हो गई थी। हालांकि कजोड़ी देवी के नाम के चयन के पीछे पार्टी की ओर से बताए गए कारणों से अलग-अलग राजनीतिक चर्चाएं सामने आ रही हैं।

अंतिम रूप से अध्यक्ष का चुनाव पार्षदों द्वारा निर्धारित निर्वाचन प्रक्रिया के तहत होगा। अब मतदान 21 सितंबर को होगा। कजोड़ी देवी के सामने कांग्रेस के बनवारी बैरवा भी अध्यक्ष के लिए नामांकन भर चुके हैं। बनवारी निर्दलीय चुनाव जीते थे और कांग्रेस के टिकट से अध्यक्ष के लिए नामांकन भरा। यानि कहने का मतलब कांग्रेस के पास इस वर्ग का कोई विजेता प्रत्याशी ही नहीं था। चुनाव नतीजों में कांग्रेस के 8 सदस्य जीते। लेकिन इनमें से एक भी एससी वर्ग का नहीं था।

पालिकाध्यक्ष चुनाव का सस्पेंस खत्म, अब केवल सीधा मुकाबला तय

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