Deoli News 21 सितंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) जैन समाज के दशलक्षण महापर्व के छठवें दिन सोमवार को नासिरदा एवं देवली में उत्तम संयम धर्म की आराधना श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ की गई। नासिरदा के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में सुगंध दशमी पर्व पर नित्य नियम पूजा-पाठ के साथ सोलहकारण पूजा, सुगंध दशमी पूजा, उत्तम संयम धर्म पूजा एवं तत्वार्थ सूत्र पूजा पं अभिषेक जैन ने कराई।
देवली में मुनि सुप्रभसागर ने कहा कि ऊंट को नियंत्रित करने के लिए नकेल, घोड़े के लिए लगाम और गाड़ी के लिए ब्रेक की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मनुष्य को स्वयं पर नियंत्रण के लिए संयम जरूरी है। उन्होंने कहा कि इंद्रियों और मन पर नियंत्रण नहीं होने के कारण व्यक्ति अनेक कष्टों में फंसता है, जबकि संयम को अपनाने वाला दुर्गति को प्राप्त नहीं होता। नासिरदा से समाज के महामंत्री राजेश कुमार कटारिया ने बताया कि सबसे पहले मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ एवं भगवान शांतिनाथ का कलशाभिषेक किया गया। बोली के माध्यम से प्रथम अभिषेक एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य टीकमचंद, गोवर्धनलाल, शिखरचंद, राजकुमार एवं महेंद्र कुमार जैन परिवार को मिला। शाम को आठ कर्मों के नाश के भाव से धूप खेवन तथा संगीतमय सामूहिक आरती की गई।
देवली के श्रीमहावीर मंदिर में सुबह अभिषेक एवं शांतिधारा के बाद उपवास करने वाले श्रावकों का सामूहिक पारणा कराया गया। दोपहर बाद मुनि सुप्रभसागर ससंघ ने सभी शिविरार्थियों के साथ देवली के विभिन्न जिनमंदिरों की वंदना की तथा धूप का क्षेपण किया।


