एआई पोस्टर से शुरू हुआ प्रचार, अब मतदान की तारीख का इंतजार; गांवों में अभी से बनने लगे चुनावी समीकरण
Deoli News 1 अक्टूबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) पंचायत चुनाव की आरक्षण लॉटरी निकलने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। अभी मतदान की तारीख घोषित भी नहीं हुई है, लेकिन गांवों में सरपंच बनने की ख्वाहिश रखने वालों ने अपनी दावेदारी जतानी शुरू कर दी है।
स्थिति यह है कि कई गांवों में आधा दर्जन से अधिक संभावित प्रत्याशी खुद को सरपंच पद का दावेदार मानकर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में जुट गए हैं। आरक्षण की लॉटरी ने जहां कई संभावित उम्मीदवारों के चुनावी सपनों को नई दिशा दी है, वहीं कुछ गांवों में सरपंच पद के दावेदारों की संख्या लगातार बढ़ती नजर आ रही है। गांव की चौपाल से लेकर चाय की थड़ियों तक अब विकास कार्यों से ज्यादा चुनावी चर्चाएं सुनाई देने लगी हैं। कौन चुनाव लड़ेगा, किसे किसका समर्थन मिलेगा और किसकी दावेदारी कितनी मजबूत होगी, इसे लेकर ग्रामीणों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
सोशल मीडिया बना चुनावी प्रचार का अखाड़ा
पंचायत चुनाव की तारीख घोषित होने से पहले ही फिलहाल संभावित प्रत्याशियों ने सोशल मीडिया को प्रचार का माध्यम बना लिया है। फेसबुक और व्हाट्सएप पर अपनी तस्वीरों के साथ आकर्षक पोस्टर साझा कर मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश की जा रही है। खास बात यह है कि इस बार चुनावी प्रचार में एआई आधारित पोस्टर भी खूब दिखाई देने लगे हैं। तकनीक की मदद से तैयार आकर्षक तस्वीरों और संदेशों के जरिए संभावित प्रत्याशी अभी से अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में जुटे हैं। कई प्रत्याशी सोशल मीडिया पर अपनी दावेदारी जता रहे हैं, तो कुछ गांव के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने में लगे हैं। हालांकि अभी चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ है, लेकिन संभावित उम्मीदवारों की सक्रियता देखकर ऐसा लग रहा है कि चुनावी तैयारियां काफी पहले शुरू हो चुकी हैं।
कई गांवों में दावेदारों की लंबी कतार…
समीपवर्ती ऊंचा गांव में ही करीब आधा दर्जन उम्मीदवार सोशल मीडिया के माध्यम से सरपंच पद के लिए अपनी दावेदारी जता चुके हैं। इसी तरह पनवाड़, सांवतगढ़, कुचलवाड़ा, टीकड़ और राजकोट, राजमहल सहित आसपास के गांवों में भी सरपंच पद के संभावित दावेदारों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जबकि देवली गांव इस बार नगर पालिका में शामिल हो चुका है। कई गांवों में आधा दर्जन तो कहीं एक दर्जन तक लोग चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में जुटे हैं। ऐसे में गांवों में अभी से चुनावी गणित बैठाने का सिलसिला शुरू हो गया है। संभावित प्रत्याशी अपने समर्थकों और परिचितों के जरिए जनसंपर्क बढ़ाने में लगे हैं। वहीं ग्रामीण भी अपने-अपने स्तर पर संभावित उम्मीदवारों की ताकत और चुनावी संभावनाओं का आकलन कर रहे हैं।
चुनाव की तारीख का इंतजार, दावेदारों ने पहले ही संभाला मोर्चा
पंचायत चुनाव की मतदान तिथि भले ही अभी घोषित नहीं हुई हो, लेकिन आरक्षण की लॉटरी के बाद से ही गांवों में चुनावी माहौल बनने लगा है। संभावित उम्मीदवारों ने अभी से अपनी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। कोई सोशल मीडिया पर अपनी दावेदारी पेश कर रहा है तो कोई गांव में व्यक्तिगत संपर्क के जरिए समर्थन जुटाने में लगा है।


