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जैन भजनों पर देर रात तक झूमे श्रद्धालु
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शान्ति सिन्धु परिचर्चा में उमड़े गुरुभक्त
Deoli News 25 अक्टूबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) शान्ति सिन्धु व्यक्तित्व परिचर्चा को लेकर चौथे दिन मुनि सुप्रभ सागर महाराज ने आचार्य शान्तिसागर महाराज के जीवन प्रसंगों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अर्थोपार्जन और आत्ममुखता एक साथ नहीं चल सकते।

आचार्य मुनियों को उपदेश देते हुए कहते थे कि जिस प्रकार एक म्यान में दो तलवारें नहीं रह सकतीं, उसी प्रकार सांसारिक मोह और आत्मकल्याण की भावना साथ-साथ नहीं रह सकते। मुनि ने संयम धारण करने और आत्मचिंतन करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि संयम के बिना मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं है। आत्मचिंतन के बिना आत्मतत्त्व का ज्ञान भी नहीं हो सकता। आचार्य शान्तिसागर महाराज महान विभूति थे। उन्हें किसी उपाधि से अलंकृत करना सूर्य को दीपक दिखाने के समान है। उन्होंने अपनी मुनि-व्रत साधना को सल्लेखना के साथ पूर्ण किया। 36 दिनों तक चली समाधि साधना में उन्होंने 25 दिन उपवास किया तथा शेष 11 दिनों में अल्प मात्रा में जल ग्रहण किया।
इस दौरान उन्होंने किसी से सेवा भी नहीं करवाई। वहीं मुनि वैराग्य सागर महाराज ने कहा कि जब एक श्रावक श्रद्धापूर्वक समाधिमरण करता है, तो वह सात-आठ भव में मुक्ति प्राप्त कर सकता है। वहीं मुनि के समाधिमरण से उसी भव में मुक्ति का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। कार्यक्रम में आचार्य शान्तिसागर महाराज के जीवन पर अर्चना अर्पित जैन, राजकुमार कोठारी और समीक्षा जैन ने अपने विचार व्यक्त किए। वही आचार्य शांति सागर महाराज की ओर से दी गई दीक्षा की जानकारी रखने पर देवली के अंकित जैन डाबर को मुनि द्वारा सम्मानित किया गया।
जैन मुनि सुप्रभ सागर ने आचार्य शांति सागर महाराज के चरण चिन्ह प्रतिकृति डाबर को सौपी। यहां नीमच, लाडपुरा और कोटा से भी गुरुभक्त पहुंचे। शनिवार रात रजैन भजन जैमिंग का आयोजन हुआ। इसमें जिनवाणी फेम प्रखर जैन, आस्था जैन और अहिंसा जैन ने जैन भजनों की प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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