Deoli News 8 नवम्बर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) दीपावली के अवसर पर रविवार को गुर्जर समाज में पीढ़ियों से चली आ रही छांट भरने की परंपरा निभाई गई। इस परंपरा के तहत समाज के लोग अपने पूर्वजों को याद कर उनका तर्पण करते हैं।
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वहीं परिवार में जन्मे नवजात शिशुओं को भी समाज की परंपराओं से जोड़कर उनका स्वागत किया जाता है। समाज के धर्मराज गुर्जर ने बताया कि परंपरा के अनुसार समाज के लोग सुबह व्रत रखते हैं और गांव के किसी तालाब या जलस्रोत के किनारे सामूहिक रूप से एकत्रित होते हैं। यहां पूर्वजों को याद करते हुए श्रद्धापूर्वक तर्पण किया जाता है। जिन परिवारों में नया बच्चा जन्म लेता है, उसे भी इस परंपरा में शामिल किया जाता है। नवजात शिशु का हाथ बेल की बेल पर रखवाया जाता है। मान्यता है कि जिस प्रकार बेल की बेल आगे बढ़ती है, उसी प्रकार परिवार और वंश की वृद्धि होती रहे तथा नवजात को सुख-समृद्धि और पूर्वजों का आशीर्वाद मिले।

इस दौरान गांवड़ी गांव में भी गुर्जर समाज के लोगों ने ढोल के साथ सामूहिक रूप से छांट भरने की परंपरा निभाई। धर्मराज ने बताया कि यह परंपरा पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, नई पीढ़ी के स्वागत और समाज की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश देती है।


