अस्पताल प्रबंधन को स्वच्छता पर ध्यान देने की जरूरत
Deoli News 7 अक्टूबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) राजकीय उप जिला चिकित्सालय देवली में ओपीडी टाइम व इसके बाद सफाई व्यवस्थाएं पटरी से उतर जाती हैं, जिस कारण मरीजों और उनके अटेंडरों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
अपरान्ह बाद व शाम ढलते ही चिकित्सालय परिसर स्वच्छता और सुरक्षा के लिहाज से चुनौतियों का केंद्र बन जाता है। स्वच्छता और अतिक्रमण की गंभीर चुनौती ओपीडी समय समाप्त होने के बाद अस्पताल परिसर में आवारा कुत्ते (स्वान) और मवेशी घूमने लगते हैं। जिससे चारों ओर गंदगी फैलती है। इतना ही नहीं शाम के बाद जगह-जगह खून से सनी पट्टियां और अन्य कचरा दिखाई देता है, जो संक्रमण का खतरा बढ़ाता है। सुबह तक हालत खराब हो जाती है। इमरजेंसी वार्ड में भी स्थिति चिंताजनक है। मेडिकल अपशिष्ट निकालने के बाद रखे डस्टबिन अक्सर ओवरफ्लो हो जाते हैं।
जिससे कचरा बाहर फैलकर बदबू और गंदगी का माहौल बनाता है। प्लास्टर आदि लगाने की जगह भी सफाई के अभाव में गंदी रहती है। शौचालय और यूरिनल की स्थिति भी खराब है, जहां हर वक्त गंदगी पसरी रहती है।
परिसर में बाहरी लोगों का जमावड़ा
सुरक्षा और व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि रात के वक्त चिकित्सालय परिसर असामाजिक तत्वों और बाहरी लोगों का अड्डा बन जाता है। परिसर में शराबी लोग शरण लेते हैं। कई लोग रात में लैब की ओर और मुख्यमंत्री निशुल्क दवा केंद्र के बाहर सोते रहते हैं, जिनका न तो अस्पताल से कोई संबंध होता है और न ही उनका कोई मरीज भर्ती होता है। कुल मिलाकर, शाम से लेकर सुबह तक राजकीय चिकित्सालय एक तरह से गंदगी और अव्यवस्था का केंद्र बन जाता है। स्थानीय निवासियों और मरीजों ने चिकित्सालय प्रबंधन से इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देने की मांग की है।
अस्पताल की गरिमा और मरीजों के स्वास्थ्य को देखते हुए सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने और रात्रि में सुरक्षाकर्मियों की सख्त जरूरत है, ताकि परिसर में बाहरी लोगों का प्रवेश रोका जा सके।
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