(उपचुनाव)
@राजेन्द्र बागड़ी, वरिष्ठ पत्रकार
Political Report 19 जुलाई( दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) दो विधानसभा चुनाव और एक लोकसभा चुनाव हारने के बाद बीजेपी के लिए देवली-उनियारा विधानसभा की सीट पर उम्मीदवार का चयन ” उलझ-कुकड़ी” बन गई है। आगामी दिनों में होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस के लिए सीट बरकरार रखने की चुनौती है तो बीजेपी के लिए इस सीट पर फिर से कब्जा करने की कोशिश है।
असल मे सबसे बड़ा सवाल दोनो ही दलों के पास उपर्युक्त उम्मीदवार का टोटा है। कांग्रेस के विधायक हरीश मीना के टोंक से सांसद चुने जाने के बाद अब कांग्रेस के सामने उम्मीदवार का चयन करना कठिन लग रहा है, वहीं लगातार दो बार विधानसभा सीट से मिली हार ने बीजेपी के लिए भी बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। प्रदेश में बीजेपी की सरकार होने की वजह से प्रदेश के 5 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव राजनीतिक प्रतिष्ठा को प्रभावित करेंगे, बल्कि सरकार की दिशा भी तय करेंगे। देवली- उनियारा विधानसभा सीट पर अब तक के इतिहास को देखें तो दोनो पार्टियां गुर्जर-मीणा जातियों पर दांव खेलती आई है। चुनावों में बीजेपी ने गुर्जर को तो कांग्रेस ने मीणा जाति के उम्मीदवार उतारे है।
जिनमे तीन बार मीणा प्रत्याशी जीते है। जबकि गुर्जर जाति के एक ही प्रत्याशी जीते है। ऐसे में सबसे अहम सवाल उपचुनाव में प्रत्याशी का चयन है। जातिगत समीकरणों के हिसाब से देखा जाए तो बीते तीन चुनावों में कांग्रेस ने मीणा प्रत्याशी उतारे है, और चुनाव भी जीते है। ऐसे में सहज सवाल यहीं है कि कांग्रेस मीणा जाति के प्रत्याशी को टिकट देगी या फिर कोई और दांव खेलेगी? कांग्रेस के लिए गुर्जर उम्मीदवार को टिकट देना इसलिए भी थोड़ा कठिन नजर आ रहा है कि टोंक से सचिन पायलट के विधायक होने के कारण जिले में दूसरे गुर्जर उम्मीदवार को टिकट देने से सन्देश गलत जा सकता है। इसलिए ज्यादातर चांस मीणा उम्मीदवार के चयन पर फोकस रह सकता है। इसी मामले में अभी कांग्रेस के पास ऐसा उम्मीदवार नही है, जो सीट पर लोकप्रिय हो। कमोबेश यहीं स्थिति बीजेपी की है। बीजेपी के राजेन्द्र गुर्जर, विजय बैसला के लगातार विधानसभा चुनाव हारने के बाद उम्मीदवार का चयन एक बार फिर उलझा हुआ है।
जातिगत समीकरण के बीच कांग्रेस और बीजेपी समेत दोनो दल मशक्कत में जुटे है। लेकिन फिलहाल ऐसा कोई प्रत्याशी स्क्रीन पर नही आया है। हालांकि अभी उपचुनाव की घोषणा तो नही हुई है, लेकिन राजनीतिक दलों की मशक्कत दिखा रही है कि दोनों ही दल उपचुनावों के प्रति गम्भीर है। देवली-उनियारा सीट कांग्रेस जीत जाती है तो सचिन पायलट के प्रभाव में बढ़ोतरी होगी और सीट बीजेपी जीत जाती है तो सरकार की प्रतिष्ठा बढ़ेगी ये तय है।



