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कांग्रेस ने शुरू की चुनावी तैयारी
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स्थानीय सांसद हरिश्चंद्र मीणा 19 अगस्त को देवली में संगठन की बैठक में करेंगे मंथन
Deoli News 18 अगस्त (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) देवली नगर पालिका चुनाव 2026 में अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस और भाजपा के सामने अपने-अपने खेमे से मजबूत और जिताऊ प्रत्याशी चुनने की होगी। वार्डों के आरक्षण की तस्वीर साफ होने के साथ ही दोनों प्रमुख दलों में संभावित चेहरों को लेकर मंथन का दौर शुरू हो गया है।
वहीं कांग्रेस ने इस दिशा में अपनी चुनावी तैयारी आगे बढ़ाते हुए संगठन स्तर पर बैठक और चर्चा की तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस से स्थानीय सांसद हरिश्चंद्र मीणा और विधानसभा प्रभारी 19 अगस्त को देवली आएंगे। इस दौरान संगठन की बैठक में नगर पालिका चुनाव को लेकर चर्चा की जाएगी। माना जा रहा है कि बैठक में वार्ड आरक्षण के बाद बदले राजनीतिक समीकरण, संभावित प्रत्याशियों और संगठन की चुनावी रणनीति को लेकर भी मंथन हो सकता है।
अध्यक्ष पद के लिए जिताऊ चेहरा तलाशना चुनौती!
अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने से कांग्रेस और भाजपा दोनों को अब एससी वर्ग से ऐसे चेहरे की तलाश करनी होगी, जो न केवल पार्षद का चुनाव जीतने की क्षमता रखता हो, बल्कि अध्यक्ष पद के लिए पार्टी के भीतर और पार्षदों के बीच मजबूत दावेदार भी साबित हो सके। सिर्फ अनुसूचित जाति वर्ग से होना ही पर्याप्त नहीं होगा। उम्मीदवार का स्थानीय जनाधार, सामाजिक स्वीकार्यता, राजनीतिक सक्रियता और अपने वार्ड में चुनाव जीतने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी। यही वजह है कि दोनों दलों के लिए अध्यक्ष पद का चेहरा चुनना इस बार आसान फैसला नहीं माना जा रहा।
कांग्रेस ने शुरू किया मंथन, 19 अगस्त की बैठक पर नजर
वार्ड आरक्षण सामने आने के बाद कांग्रेस ने संगठन स्तर पर चुनावी गतिविधियां तेज करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। स्थानीय सांसद हरिश्चंद्र का 19 अगस्त को देवली दौरा इसी लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संगठन की बैठक में संभावित प्रत्याशियों और वार्डवार चुनावी स्थिति को लेकर चर्चा होने की संभावना है।
खासकर अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित वार्डों में मजबूत चेहरों की तलाश और ऐसे प्रत्याशियों को लेकर विचार-विमर्श महत्वपूर्ण रहेगा, जो चुनाव जीतने के बाद अध्यक्ष पद के लिए पार्टी की स्थिति मजबूत कर सकें। इसमें भी भाजपा के लिए अध्यक्ष पद का चेहरा तलाशना कांग्रेस के मुकाबले ज्यादा कठिन होगा।
भाजपा के सामने भी यही चुनौती
अध्यक्ष पद के लिए भाजपा के सामने भी कांग्रेस जैसी ही चुनौती है। पार्टी को अनुसूचित जाति वर्ग में ऐसा चेहरा तलाशना होगा, जिसकी अपने समाज में मजबूत पकड़ होने के साथ-साथ दूसरे वर्गों में भी स्वीकार्यता हो। नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं बल्कि पार्षदों के माध्यम से होने के कारण पार्टी के लिए ऐसे उम्मीदवारों का चयन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, जो चुनाव जीतने के बाद संगठन के साथ मजबूती से खड़े रह सकें।
एससी के 8 वार्डों पर रहेगी खास नजर
देवली नगर पालिका के 35 वार्डों में अनुसूचित जाति के लिए 8 वार्ड आरक्षित किए गए हैं। इनमें 5 अनुसूचित जाति और 3 अनुसूचित जाति महिला वार्ड शामिल हैं। अध्यक्ष पद भी एससी के लिए आरक्षित होने के कारण इन वार्डों के चुनाव परिणाम को इस बार सामान्य वार्डों की तुलना में अलग नजरिए से देखा जाएगा। हालांकि 18 सामान्य वार्ड होने के कारण सबसे ज्यादा दावेदारी और राजनीतिक घमासान इन्हीं सीटों पर देखने को मिल सकता है, लेकिन अध्यक्ष पद के समीकरण के कारण एससी आरक्षित वार्ड भी चुनाव की धुरी बनेंगे।
अब किस चेहरे पर दांव लगाएंगे दोनों दल?
देवली नगर पालिका चुनाव में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस और भाजपा में से कौन सा दल अनुसूचित जाति वर्ग से ऐसा दमदार चेहरा सामने लाता है, जो पहले पार्षद का चुनाव जीत सके और फिर अध्यक्ष पद के लिए पार्टी के पक्ष में पर्याप्त समर्थन जुटा सके। कांग्रेस की ओर से 19 अगस्त को होने वाली संगठन की बैठक को इसी तैयारी की शुरुआती कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। बैठक के बाद संभावित दावेदारों और वार्डवार रणनीति को लेकर तस्वीर कुछ और साफ हो सकती है।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि कांग्रेस बैठक में किन नामों और समीकरणों पर चर्चा होती है और भाजपा अपने स्तर पर किस रणनीति के साथ मैदान में उतरती है। आरक्षण ने अध्यक्ष पद की श्रेणी तय कर दी है, लेकिन असली राजनीतिक मुकाबला अब उस चेहरे को लेकर होगा, जिसे दोनों प्रमुख दल अध्यक्ष पद की दौड़ में अपना सबसे मजबूत उम्मीदवार मानते हैं।


