Sunday, April 19, 2026
No menu items!
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img
HomeDainik Bureau Desk"जीबीएस सिंड्रोम के देवली में आएं आधा दर्जन मामले"

“जीबीएस सिंड्रोम के देवली में आएं आधा दर्जन मामले”

एक युवक गवां चुका है जान, लोगों में है भय

(इन्वेस्टिगेशन न्यूज)

@आशीष बागड़ी


Deoli News 21 मई (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) देवली शहर में अब तक जीबीएस सिंड्रोम (गुइलैन-बैरे सिंड्रोम) (Guillain-Barré Syndrome-GBS) के करीब आधा दर्जन मामले सामने आ चुके हैं। यह मामले चौंकाने वाले हैं। लेकिन अभी तक चिकित्सा विभाग इसे लेकर गंभीर नहीं हुआ है। जबकि इस तरह के सिंड्रोम से ग्रसित लोग भारत में बड़े शहरों में ही पाए गए थे।

चिकित्सकों के अनुसार यह दुर्लभ व गंभीर ऑटोइम्यून विकार है, जिसमें व्यक्ति की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली उसकी नसों पर हमला करने लगती है। यह स्थिति तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है, जिससे मांसपेशियों में कमजोरी, झुनझुनी और कभी-कभी पूरी तरह से लकवा तक हो सकता है। अब तक बच्चों समेत आधा दर्जन केस सामने आ चुके हैं। देवली में ज्यादातर लकवे के लक्षण दिखाई दिए हैं।

जीबीएस सिंड्रोम के संभावित कारण

उक्त सिंड्रोम का सटीक कारण फिलहाल ज्ञात नहीं है, लेकिन यह अक्सर किसी संक्रमण के बाद होता है। इनमें वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण, फ्लू या जुकाम, डेंगू या ज़ीका वायरस हाल ही में हुआ टीकाकरण या सर्जरी शामिल हैं।

यह हो सकते है लक्षण

उक्त बीमारी के लक्षण धीरे-धीरे शुरू होते हैं और कुछ ही दिनों या हफ्तों में गंभीर हो सकते हैं। इनमें हाथों और पैरों में झुनझुनी या सुन्नता मांसपेशियों में कमजोरी (अक्सर पैरों से शुरू होकर ऊपर की ओर बढ़ती है) चलने में कठिनाई या संतुलन का बिगड़ना, हाथ-पैरों का लकवा सांस लेने में कठिनाई (गंभीर मामलों में), बोलने या निगलने में कठिनाई, हृदयगति या रक्तचाप में असामान्यता शामिल हैं। बताया गया कि उक्त बीमारी के कई प्रकार है। इनमें एआईडीपी (Acute Inflammatory Demyelinating Polyneuropathy) सबसे सामान्य प्रकार है। इसी तरह AMAN (Acute Motor Axonal Neuropathy, AMSAN (Acute Motor and Sensory Axonal Neuropathy), Miller Fisher Syndrome आंखों की मांसपेशियों और संतुलन को प्रभावित करता है।

इलाज की यह है प्रक्रिया

चिकित्सकों के अनुसार जीबीएस का कोई स्थाई इलाज नहीं है, लेकिन इसके प्रभावों को कम करने और सुधार के लिए कुछ उपचार उपलब्ध हैं। जिनमें (इम्यूनोग्लोब्युलिन थेरेपी), शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को शांत करता है। (प्लास्मा फेरेसिस) खून से हानिकारक एंटीबॉडी हटाना, (फिजिकल थेरेपी) मांसपेशियों की ताकत और मूवमेंट को बहाल करने में मदद करना है।

देवली में यह लोग हुए जीबीएस से ग्रसित

बता दे कि यह गंभीर बीमारी देवली में अब तक आधा दर्जन लोगों को अपनी चपेट में ले चुकी है। इनमें व्यापार महासंघ के अध्यक्ष एवं नगर पालिका पार्षद पंकज जैन भी शामिल है। जिन्हें कुछ दिन पूर्व अस्वस्थ होने पर जयपुर ले जाया गया और वह कई दिनों तक जयपुर में ही भर्ती रहे। वहीं जैन को अभी भी चलने फिरने में दिक्कत हो रही है व कमर की प्रॉब्लम से ग्रसित है।

इसी तरह पटेल नगर निवासी एवं पटवारी पंकज जैन भी पिछले दिनों जीबीएस सिंड्रोम से ग्रसित हो गए थे। वे भी जयपुर में भर्ती रहे और फिलहाल स्वास्थ्य लाभ के चलते छुट्टियों पर है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी से वे बेहद परेशान रहे। इसके अलावा देवली चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ. जगनलाल मीणा की करीब 5 वर्षीय पुत्री इयाना भी इस सिंड्रोम की चपेट में आ गई थी। जिसका जयपुर के सूर्या हॉस्पिटल में उपचार चला। अभी भी इयाना को रिकवर करने में डॉ. जगनलाल और उनकी पत्नी डॉ. संजू मीणा पूरी कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा इति गोयल पुत्री अभिनव गोयल निवासी ज्योति कॉलोनी भी राजस्थान हॉस्पिटल जयपुर में भर्ती है। यह बालिका 8 वर्षीय है। जानकारी के मुताबिक पिछले दिनों शहर के पटेल नगर में एक युवक की मौत भी इसी सिंड्रोम से ग्रसित होने के बाद कई महीने उपचार के बाद हुई थी। लिहाजा शहर वीडियो में उक्त सिंड्रोम को लेकर भय फैला हुआ है।

जानकारी है, लेकिन आधिकारिक डाटा नहीं आए

इस संबंध में देवली चिकित्सालय के अधिकारी प्रभारी डॉ. राजकुमार गुप्ता का कहना है कि उन्हें भी उक्त सिंड्रोम से ग्रसित लोगों की जानकारी लोगों से मिली है। लेकिन उनके डिपार्टमेंट से इस तरह के आधिकारिक डाटा उन्हें नहीं मिले हैं। वह उच्च अधिकारियों को इस मामले में जानकारी देंगे।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

%d