Tuesday, April 21, 2026
No menu items!
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img
HomeBjpदेवली-उनियारा में उलझन बरकरार, प्रत्याशी तय करने में दोनो ही दलों में...

देवली-उनियारा में उलझन बरकरार, प्रत्याशी तय करने में दोनो ही दलों में पेशोपेश

@राजेन्द्र बागड़ी, वरिष्ठ पत्रकार


Political Report 26 अगस्त (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) यद्दपि उपचुनावों को लेकर प्रदेश में बीजेपी सरकार गम्भीर तो है लेकिन 6 सीटों पर होने वाले उपचुनावों में कांग्रेस से सीटे हथियाना कोई आसान नही लग रहा है। अव्वल तो सलूम्बर को छोड़कर सभी 5 सीटों पर कांग्रेस की जीत हुई थी।

लेकिन अब तो भील प्रदेश के मुद्दे के चलते सलूम्बर सीट पर भी पेच फंसता लग रहा है। खासकर देवली-उनियारा सीट को लेकर दोनो ही दलों में पेशोपेश बरकरार है। कांग्रेस बीजेपी के प्रत्याशी घोषित होने की प्रतीक्षा कर रही है तो बीजेपी में फिलहाल असमंजस बना हुआ है। उम्मीद है जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों के बाद प्रदेश में उपचुनावों की तिथि घोषित हो जाए। सबसे बड़ा लब्बोलुआब उम्मीदवार के चयन को लेकर है। देवली-उनियारा सीट पर गत तीन हार के बाद बीजेपी उम्मीदवार के चयन को लेकर कोई जल्दबाजी नही करना चाहती। गत दिनों टोंक में हुई बीजेपी के राजस्थान प्रभारी डॉ. राधामोहन अग्रवाल, सह प्रभारी विजया रहाटकर, प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ समेत नेताओं ने देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न वर्गों, कार्यकर्ताओं की बैठकें कर थाह पाने की कोशिश की।

लेकिन फिलहाल प्रत्याशी के चयन को लेकर कोई बड़ी जानकारी सामने नही आई है। प्रतीत होता है पार्टी इस मुद्दे को लेकर कोई अंतिम फैसले पर नही पहुँची है। इस सामान्य सीट पर बीजेपी लगातार एक ही वर्ग के उम्मीदवार को प्रत्याशी बनाती आई है। इस बार क्या होगा, कोई दावा नही कर सकता। पूर्व विधायक राजेन्द्र गुर्जर, गत प्रत्याशी विजय बैसला, प्रो. विक्रम सिंह गुर्जर, सीताराम पोसवाल समेत कई दावेदारों के सामने आने से पार्टी के समक्ष भारी उलझन है। पार्टी के अधिकांश कार्यकर्ता, नेता, वैचारिक लोग इस बार स्थानीय व लोकप्रिय व्यक्तित्व को मैदान में उतारने की मांग कर रहे है।

ऐसे में पार्टी के समक्ष बड़ी भारी चुनौती है कि वह आखिर किसे उम्मीदवार चुने। आम मतदाता भी इस बार लीक से हटकर उम्मीदवार बनाने के पक्ष में है। सामान्य वर्ग के लोग भी यह चाहते है कि यदि पूर्व में किए गए प्रयोग में बदलाव होता है तो चुनाव रोचक हो सकते है। देखना ये है कि कांग्रेस पहले उम्मीदवार घोषित करेगी या बीजेपी पहले घोषित करेगी। लेकिन ये तय है कि इस चुनाव में सामान्य वर्ग के मतदाताओं पर निर्भर होगा कि वे दोनों ही दलों से स्थानीय उम्मीदवार घोषित करने की मांग मनवा पाते है या नही। चुनाव के ट्रेंड के मुताबिक बीजेपी गुर्जर व कांग्रेस मीणा उम्मीदवार उतारती आई है। संभावना ये भी है कि यदि दोनों दलों ने अपना ट्रेंड नही बदला तो सामान्य वर्ग का प्रत्याशी निर्दलीय होकर ताल ठोक सकता है।

ऐसे में बीजेपी को नुकसान संभव है। बीते विधानसभा चुनाव में विजय बैसला के विरूद्ध उन्हीं की जाति के एक प्रत्याशी के खड़े रहने से बीजेपी के बैसला चुनाव हार गए थे। लिहाजा इस बार पार्टी कोई जोखिम नहीं लेना चाहती है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

%d