Deoli News 25 जुलाई (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) श्रीमहावीर दिगम्बर जैन मंदिर में मुनि वैराग्य सागर महाराज एवं मुनि सुप्रभ सागर महाराज के सानिध्य में आष्टानिका महापर्व का पाँचवाँ दिन भी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया।
इस दौरान विधान के तहत कुल 128 अर्घ समर्पित किए गए। अंकित जैन डाबर ने बताया कि महापर्व पर मुनि सुप्रभ सागर महाराज ने प्रवचन में कहा कि श्री सिद्धचक्र मंडल विधान में कुल वलय यानी भाग होते हैं, जिनमें पाँचवें वलय यानी पंचम भाग में 128 अर्घ होते हैं और इसमें 108 प्रकार के पापाश्रव यानी पाप के आने के मार्ग के निवारक अर्घ समाहित होते हैं। यह भाग जीव को पाप कर्मों से बचाने और आत्मशुद्धि की प्रेरणा देता है। विधान के अवसर पर प्रथम अभिषेक, शांतिधारा, मुनि के पाद प्रक्षालन और शास्त्र भेंट का सौभाग्य शांतिलाल, राजेश कुमार तथा कमलेश पाटनी परिवार को प्राप्त हुआ। धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने पूरी तन्मयता के साथ सहभागिता कर भगवान जिनेन्द्र देव की आराधना की।



