स्वाद और स्वास्थ्य से समझौता नहीं
Deoli News 8 नवंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) दीपावली पर मिठाई की खुशबू किसी से छिपी नहीं है। लेकिन पिछले काफी समय से मावे की मिठाइयों में हो रही मिलावट से अब परिवारों में बाहरी मिठाइयों से मोह भंग होता जा रहा है।

नतीजन परंपरागत व घरेलू मिठाइयां फिर से घर में पेठ बनाने लगी है। उल्लेखनीय की दीपावली पर सभी त्योहारों के मुकाबले अधिक मात्रा में मिठाइयों की खपत होती है। लिहाजा मिठाइयों की आपूर्ति बढ़ाने के नाम पर नकली मावे की मिठाई भी खूब बिकती है। आए दिन इन खबरों से लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैली है। वहीं अब कई परिवारों में घरों में महिलाएं मिठाइयां बना रही है। पटेल नगर निवासी कमलेश मूंदड़ा व विवेकानंद कॉलोनी निवासी वंदना तोषनीवाल आदि महिलाओं ने बताया कि बाहरी मिठाइयां में मिलावट का भय रहता है।
इसकी वजह से घरों में ही गुलाब जामुन, रसगुल्ला, बेसन की चक्की, मक्खन बड़ा, मैसूर पाक, काजू कतली, खोपरा पाक आदि मिठाइयां बना रही है। शहर निवासी प्रीति बिड़ला शुभा मालू, भंवरी देवी मालू आदि महिलाओं का कहना है कि वह स्वयं हाथों से मिठाई बनाती है तो उन्हें मिलावट का भय नहीं रहता है। खासकर अपने परिवार के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं होगा। महिलाओं ने बताया कि उन्होंने मैदा के गूंजे, शाक्या व नमकीन भी बनाई है, ताकि मिलावट के जहर से बच सके। अक्सर देखा गया कि पिछले कहीं वर्षों से घरों में मावे की मिठाई के मुकाबले ड्राई फ्रूट की भी आवाभगत में पेशकश होने लगी है। इसकी वजह लोग मिलावटी मिठाई खाने से बचने लगे हैं, ताकि स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ ना हो।



