Deoli News 25 सितंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) दशलक्षण महापर्व के समापन पर उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के अवसर पर मुनि वैराग्य सागर महाराज ने कहा कि पर-द्रव्यों से विरक्त होकर आत्मा में लीन होना ही वास्तविक ब्रह्मचर्य है। महापुरुषों ने काम से ध्यान हटाकर ऊर्जा को आत्म-कल्याण की ओर मोड़ा।


जबकि आज विकृत खानपान से वासना बढ़ रही है। मुनि सुप्रभ सागर महाराज ने कहा कि दशलक्षण धर्म का सार ब्रह्मचर्य है और मनुष्य की वास्तविक पूज्यता उसके शील से ही होती है। वासना पर नियंत्रण के लिए शुद्ध खानपान और मर्यादित रहन-सहन जरूरी है। इससे पूर्व संध्या पर शिविरार्थियों द्वारा महाआरती का आयोजन किया गया। यह जानकारी अंकित जैन डाबर ने दी।
पार्श्वनाथ मंदिर में उत्तम ब्रह्मचर्य की पूजा, 1152 दीपकों से सजा भक्तांबर विधान
श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर नासिरदा में दशलक्षण महापर्व के तहत गुरुवार को उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म और मंडल विधान की विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई। इस अवसर पर मिलापचंद नेमीचंद पदम कुमार विनोद कुमार सिंहल परिवार को सौधर्म इंद्र बनने, प्रथम शांतिधारा करने तथा भगवान वासुपूज्य का निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य मिला। अन्य श्रद्धालुओं ने भी शांतिधारा में पुण्यार्जन किया।
महामंत्री राजेश कुमार कटारिया ने बताया कि शाम को गाजे-बाजे के साथ भगवान का जुलूस निकालकर कलशाभिषेक किया जा रहा है। सामूहिक आरती और 1152 दीपकों से भव्य भक्तांबर विधान आयोजित हुआ।


