Deoli News 29 दिसंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) संगीतमय श्रीराम कथा के चौथे दिन रविवार को पं पुष्प मुरारी बापू ने भगवान शिव और पार्वतीजी के विवाह का सुंदर वर्णन किया। वही कथा में काम, क्रोध और लोभ तीन को अत्यंत कष्टदायक बताया।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव के हाथ में त्रिशूल रहता है। काम, क्रोध व लोभ यह तीन मनुष्य के शत्रु है। अतः इन्हें अपनी पकड़ में रखना चाहिए। उन्होंने शिवजी के बारात का भी वर्णन किया। जिसमें शिवजी ने भूत, प्रेत, पिशाच आदि को भी सम्मिलित किया। देवाधिदेव महादेव ऐसे देवता हैं, जिनको पूरा जगत पूजता है। भगवान शंकर को त्रिभुवन का गुरु कहा गया अर्थात देवता और बीच में पृथ्वी लोक पर मनुष्य और पाताल में रक्षा सभी भगवान शिव की पूजा करते हैं। इसके बाद रामजी के जन्म से लेकर के और अंत तक की कथा पार्वतीजी ने शिवजी से पूछी और भगवान शिव ने यह बताना शुरू किया। पुष्प मुरारी बापू ने श्रीराम जन्म के कर्म पर भी प्रकाश डाला। जिसमें मनु और शतरूपा की कथा, जालंधर और वृंदा, प्रताप भानुकी कथा, जय और विजय की कथा को संक्षेप में वर्णन किया। वहीं अयोध्या का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि उस समय रावण की अत्याचार से पृथ्वी बहुत दुखी थी, जो सभी को लेकर और भगवान नारायण की स्तुति करने लगी।
यहां भगवान प्रकट हुए और उन्होंने आश्वासन दिया कि वे अयोध्यापुरी में राजा दशरथ के यहां जन्म लेंगे। सुंदर झांकी के साथ भगवान का जन्मोत्सव मनाया गया।


