Deoli News 9 फरवरी (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) शहर के डॉ. अम्बेडकर विचार मंच सेवा समिति देवली ने यूजीसी द्वारा अधिसूचित ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस’ रेगुलेशन-2026 पर लगी रोक हटाने और इसके पूर्ण समर्थन में उपखण्ड अधिकारी के जरिए राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा है।
मीडिया प्रभारी दिलखुश टाटावत ने बताया कि यह नियम उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और दिव्यांगों के विरुद्ध होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए एक क्रांतिकारी कदम है। मंच ने तर्क दिया कि यह नियम संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 46 के मूल्यों पर आधारित है और वंचित वर्ग के छात्रों को सुरक्षा प्रदान करता है। समिति ने मांग की है कि सर्वोच्च न्यायालय में इन नियमों के पक्ष में मजबूती से पक्ष रखकर इन्हें तत्काल प्रभावी बनाया जाए, ताकि कॉलेजों में ‘इक्विटी कमेटी’ और हेल्पलाइन जैसे जवाबदेह तंत्र स्थापित हो सकें। मंच के पदाधिकारियों ने जोर देकर कहा कि उच्च शिक्षा में दलित और वंचित वर्ग के शिक्षकों व छात्रों की सुरक्षा के लिए यह नियम अनिवार्य हैं।
जिससे संस्थागत ढांचे में समानता का अवसर मिलेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समाज के कुछ वर्गों द्वारा इन नियमों पर आपत्ति जताना अनुचित है, क्योंकि उचित कार्यान्वयन से ही शैक्षणिक संस्थानों में सामाजिक सद्भाव बढ़ेगा। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि वंचित वर्गों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए इन प्रगतशील नियमों को बहाल नहीं किया गया, तो भविष्य में न्याय की रक्षा के लिए आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
इस दौरान अध्यक्ष पांचूलाल मीणा, यादराम मीणा, राजबहादुर वर्मा, अम्बालाल मौर्य, मोतीलाल, बाबूलाल, जयकिशन मीणा, धर्मराज गुर्जर, ललित चौहान, लालाराम गुर्जर, सुरेंद्र बैरवा, बंशी सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे।


