रूपारेल निवासी दिव्यांग की आपबीती, पुलिस ने जुटाई जानकारी
Deoli News 2 जुलाई (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) क्षेत्र की गांवड़ी पंचायत के रूपारेल निवासी एक दिव्यांग व्यक्ति ने अपने साथ हुई धोखाधड़ी से निराश होकर मंगलवार को विषाक्त का सेवन कर लिया। इससे पहले पीड़ित ने पेपर पर अपनी आपबीती लिखी, ताकि लोगों व पुलिस को इसका पता लग सके।

पुलिस के अनुसार यह पीड़ित रतिराम मीणा पुत्र खानाराम मीणा निवासी रूपारेल है। जिसने मंगलवार सुबह विषाक्त पदार्थ का सेवन कर लिया। जिससे उसकी तबीयत बिगड़ गई। ग्रामीण व पीड़ित की पत्नी दोपहर को उसे देवली चिकित्सालय लेकर आई। गनीमत यह रही कि समय रहते पीड़ित को उपचार मिल गया। जिसकी वजह से उसकी जान बच गई। लेकिन उक्त घटना के पीछे पीड़ित की मन की पीड़ा भी सामने आई है। जिसमें उसने स्वयं के साथ हुए धोखे का जिक्र किया।
पीड़ित ने बया किया अपना दर्द
पीड़ित रतिराम मीणा ने बताया कि गत कुछ वर्षों पूर्व सड़क दुर्घटना में उसका दाहिना पैर कट गया। वह कृत्रिम पैर की सहायता से चलता है। गत 3 साल पूर्व रूपारेल निवासी भवर लाल मीणा ने पीड़ित रतिराम के पास अपनी जमीन गिरवी रखी तथा उसके पेटे 60 हजार रुपए लिए। वही भंवरलाल ने रतिराम से 3 लाख 60 हजार रुपए और ब्याज पर लिए। इस तरह से भंवरलाल ने पीड़ित से 4।लाख रुपए लिए। उक्त सौदे का पीड़ित व भंवरलाल के बीच स्टांप पर लिखित समझौता हुआ। लेकिन कुछ समय बाद भंवरलाल ने कथित तौर पर इस समझौते का उल्लंघन शुरू कर दिया। पीड़ित रतिराम ने बताया कि समझौते के अनुसार भंवरलाल को हर महीने ब्याज समेत भुगतान देना था। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। आरोप है कि भंवरलाल ने गिरवी रखी जमीन भी बेच दी। वहीं पीड़ित की ओर से दिए गए चार लाख रुपए भी वापस नहीं दिए। इसे लेकर पीड़ित रतिराम ने कई बार भंवर लाल से रुपए देने का तकाजा किया।
लेकिन उसे निराशा हाथ लगी। पीड़ित रतिराम ने बताया कि सब तरफ से निराशा मिलने के बाद उसने मंगलवार सुबह चूहे मारने की दवा का सेवन कर लिया। पीड़ित की पत्नी काली देवी ने बताया कि यह विशाल रतिराम ने घर से बाहर गांव की एक दुकान पर खाया। काली देवी भी पैर से विकलांग है। इस दौरान तबीयत बिगड़ने पर लोगों ने उसे सूचना दी। सूचना पर पत्नी काली देवी पहुंची तथा ग्रामीणों के सहयोग से देवली चिकित्सालय में उपचार के लिए भर्ती कराया। यहां समय रहते उपचार मिलने से पीड़ित रतिराम की जान बच गई। सूचना पर देवली थाना पुलिस के हेडकांस्टेबल ओमप्रकाश यादव पहुंची और उन्होंने पीड़ित से बयान लेने की कोशिश की। लेकिन अचेत अवस्था में होने की वजह से उन्हें वापस लौटना पड़ा। पुलिस ने पीड़ित की ओर से लिखे नोट को भी अपने अधिकार में ले लिया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। पुलिस ने बताया कि मामले में अभी पीड़ित ने बयान नहीं दिए हैं। वही रिपोर्ट भी नहीं दी गई है।



