मतदान फीसद बढ़ने से ” रिजल्ट” होंगे अप्रत्याशित!
@ राजेन्द्र बागड़ी
Deoli News 26 नवम्बर ( दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) राजनीतिक फिजाओं में एक सवाल बड़ी तेजी से तैर रहा है। सवाल है इस बार हुई विधानसभा चुनावों की ” साइलेंट” वोटिंग क्या कोई गुल खिलाने वाली है या परिवर्तन का अहसास है। अबकी बार हुई बम्पर वोटिंग भी कोई ” संकेत” दे रही है या बात कुछ और है! इसी विषय पर आज चर्चा करेंगें।
आमतौर पर राजनीतिक विशेषज्ञ ये मानते रहे है कि जब भी वोटिंग प्रतिशत बढ़ता है तब सूबे में सत्ता परिवर्तन होता है। कई मायनों में ये तथ्य सही साबित भी हुए है। इस बार पूरे प्रदेश का औसत मतदान का आंकड़ा तकरीबन 75 फीसद चल गया। पिछली बार 2018 के चुनाव में ये आंकड़ा 74.14 फीसद था। हालांकि 74.95 फीसद तक हुए मतदान से मात्र 0.24 फीसद अधिक है। लेकिन ये इसलिए महत्वपूर्ण है कि पिछली बार मात्र 1 फीसद से कम वोट प्रतिशत आने के कारण बीजेपी 73 सीटों पर अटक गई थी। जबकि कांग्रेस 99 सीटों पर। अबकी बार ये आंकड़ा पिछली बार से 0.24 अधिक है। ऐसे में ये प्रतिशत किसके पक्ष में जायेगा और किसके विरोध में जायेगा, ये गम्भीर चर्चा का विषय है। ये सही है कि पूरे प्रदेश में” साइलेंट” वोटिंग हुई। मतदाता चुपचाप गया और उसने चुन भी लिया, ये बात अलग है कि 3 दिसम्बर को ये उजागर होगा।
अब देखिए 1993 में 60.62 फीसदी वोटों से बीजेपी की सरकार बनी, 1998 में 63.40 फीसदी वोटों से कांग्रेस की, 2003 में 67.20 फीसदी मतदान पर बीजेपी, 2008 में 66.50 फीसदी मतदान पर कांग्रेस, 2013 में 75.23 फीसदी पर बीजेपी व 2018 में 74.71 फीसदी मतदान पर कांग्रेस की सरकार बनी। आंकड़े गवाह है जब भी प्रदेश में मतदान प्रतिशत बढ़ा है। तब विरोधी दल की सरकार बनी है, तो क्या इस बार भी कांग्रेस सरकार जा रही है? या बात कुछ अलग है!
क्या बदलेगा रिवाज?
देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र में इस बार रिकॉर्ड तोड़ मतदान हुआ, ये बड़ा परिवर्तन का संकेत प्रतीत हो रहा है। वर्ष 2018 में देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र में 70.14 प्रतिशत मतदान हुआ। जबकि इस वर्ष 2023 यानि हाल में हुए चुनाव में इसी क्षेत्र में 76.24 प्रतिशत मतदान हुआ। यानि पिछले चुनाव से 6.24 प्रतिशत मतदान बढ़ा है। ये आंकड़ा अपने आप मे चोंकाने वाला है!
सवाल है ये 6 फीसद मतदान बीजेपी के पक्ष में है या कांग्रेस के पक्ष में! लेकिन जाहिर तौर पर आंकड़े ये बताते रहे है कि जब भी मतदान प्रतिशत बढ़ा है। तब सिटिंग जनप्रतिनिधि को खतरा हुआ है। ये बहस का मुद्दा है कि सरकार किसकी बनेगी। ऐसे में 2023 तक के रिकॉर्ड के मुताबिक कोई दुबारा विधायक नही बना है।


