कांग्रेस बहुमत में आई तो गहलोत प्रबल दावेदार और बीजेपी की प्रचंड जीत हुई तो चाबी ” मोदी” के हाथ!
@राजेन्द्र बागड़ी, वरिष्ठ पत्रकार
Desk Report 2 दिसम्बर ( दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) राजस्थान में किसकी सरकार बनेगी और कौन मुख्यमंत्री बनेगा, इसमें अब कुछ घण्टे शेष बचे है। रविवार सुबह 8 बजे ईवीएम बढ़त और घटत उगलना शुरू कर देगी और दोपहर 12 बजे तक सारा कोहरा छंट जाएगा। ये तय मानिए कि एक्जिट पोल ओर एक्ज़ेक्ट रिजल्ट्स में फर्क रहना है। राजस्थान की तस्वीर साफ होते ही मुख्यमंत्री के पद की दौड़ शुरू होनी अवश्यभावी है। राज्य में माहौल को देखते हुए ज्यादातर संभावना यहीं है कि बहुमत जिसे भी मिलेगा उसे पूर्ण बहुमत ही मिलेगा!
राज्य में ये सम्भावनाए कम है कि निर्दलीयों की मदद से सरकार बनानी पड़े। वर्ष 2018 में हुए चुनाव में मात्र 1 फीसदी से कम वोट आने के बाद बीजेपी न केवल सरकार बनाने पिछड़ी, बल्कि संख्या भी घट गई। तब कांग्रेस भी 99 पर अटकी और 5 साल तक प्रदेश में जुगाड़ की सरकार चली। अबकी बार ये संभावना कम प्रतीत होती है। चाहे बीजेपी हो या कांग्रेस दोनो दलों में से किसी एक को पूर्ण बहुमत मिलने की सम्भावनाये है। कई स्थानों पर निर्दलीयों व छोटे दलों की भूमिकाएं भी रहेगी लेकिन ये संख्या दोनो दलों की हार-जीत को ही प्रभावित करेगी। निर्दलीय, छोटे दल भी अपनी उपस्थिति तो दर्ज कराएंगे लेकिन ” किंगमेकर” की भूमिका में रहेंगे इसमें संशय है। वर्ष 2018 के चुनाव में निर्दलीयों की भूमिका महत्वपूर्ण रही थी अस्तु कांग्रेस सरकार पर इनका नियंत्रण रहा। राज्य में इस बार कुछ बदलाव संभव है।
रविवार को जिस दल को बहुमत मिलेगा उसमें मुख्यमंत्री कौन होगा, ये बहस चलने वाली होगी। कांग्रेस ने चूंकि अशोक गहलोत के चेहरे पर चुनाव लड़ा लिहाजा ये करीब- करीब तय है कि कांग्रेस को बहुमत मिलने पर गहलोत के अलावा और कोई दावेदार नही होगा। चाहे कांग्रेस बहुमत के थोड़ी नीचे रही और निर्दलीयों की जरूरत पड़ी तो गहलोत कांग्रेस की सरकार बनाने में सफल हो सकते है। ये इसलिए भी माना जा सकता है कि पार्टी आला कमान की भूमिका गहलोत से इतर नही जा सकती! गहलोत ने बीते वर्षो में आला कमान नाम के शब्द को ” खूंटे पर टांग” दिया था। इस बार गहलोत ने प्रदेश में अपने बूते पर चुनाव लड़ा। जबकि बीजेपी में हालात बिल्कुल उलट है। पूरा चुनाव मोदी और कमल के चेहरे पर लड़ा गया लिहाजा यदि बीजेपी पूर्ण बहुमत से आती है तो मुख्यमंत्री की चाबी प्रधानमंत्री के पास रहनी है।
ये सारा खेल संख्या बल निर्धारित करेगा। बीजेपी की गणित यदि 105 से ऊपर जाती है तो यकीन मानिए मुख्यमंत्री वहीं बनेगा, जिसे प्रधानमंत्री चाहेंगे। यदि बीजेपी को बहुमत से कुछ कम मिलता है और निर्दलीयों की संख्या को मिलाकर सरकार बनाने की मजबूरी आती है तो फिर जो घटी संख्या की पूर्ति कर पाए, वहीं महत्वपूर्ण भूमिका में आसकते है। बीजेपी के अधिकांश बड़े नेता बहुमत से अधिक संख्या जीतकर आने की प्रार्थना कर रहे है तो कुछ ईश्वर से प्रार्थना कर रहे है कि बीजेपी की संख्या 90 से 95 तक रुक जाए और निर्दलीयों की संख्या अहम हो जाए तो राजस्थान का ताज वे पहन लें। दिनों दिन देवताओं के धोक, आशीर्वाद लेने का दस्तूर लगातार जारी भी है। हालांकि अब समाचार लिखने से महज 24 घण्टे से भी कम वक्त शेष बचा है लेकिन उम्मीदें दोनो दलों की जिंदा है। कांग्रेस में मुख्यमंत्री का चेहरा स्पष्ट है। लेकिन बीजेपी में अभी धुंधलका बना हुआ है। बीजेपी ऐसा दल है, जिसमें दो तरह के नेता है जो अलग-अलग अरदास कर रहे है।
यदि बीजेपी थोक में आती है तो एक पक्ष के नेताओ के मुंह मुरझाने तय है और बीजेपी रिटेल में आती है तो खुल्ले चिल्लर से उनका काम बनना है। बहरहाल कश्मकश चलती रहेगी, तब तक जब तक कि जनता अपना फैसला न सुना दे।


