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पुलिस के साथ परिजनों को भी सतर्क रहने की जरूरत
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शरीर पर गहन दुष्प्रभाव डालता है नशा
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युवा पीढ़ी को तेजी से गिरफ्त में ले रहा है ” स्मेक”
(कवर स्टोरी)
@राजेन्द्र बागड़ी, वरिष्ठ पत्रकार
Deoli News. 8 जनवरी (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) अधखुली आंखे, उनीदी सी नजरें अजीब सा उन्माद ये लक्षण सीधे सीधे नशे के है। शराब, गांजा के अवैधानिक सफर से अब दौर “स्मेक” तक जा पहुँचा है। खासकर युवा पीढ़ी इसकी गिरफ्त में है। नशे का ये कारोबार करोड़ो-अरबो का है। टोंक जिला तो कमोबेश पूरे जाल में है।
लाख कोशिशों के बावजूद आज तक पुलिस प्रशासन इसके ” मास्टर माइंड” को घेर नही पाई है। टोंक जिले के आखरी सीमा बिंदु देवली-हनुमान नगर थाना क्षेत्रों में पिछले दिनों पकड़ी गई करोड़ो रुपये की स्मेक, गांजे की खेप ने साबित कर दिया है कि ये कारोबार चरम पर है। दरअसल देवली टोंक, बूंदी, भीलवाडा, अजमेर, चितौड़गढ़, झालावाड़ जैसे जिलों से लगभग जुड़ा है। हर 50 से 100 किमी पर जिलों की सीमाएं बदल जाती है। ऐसे मे तस्करों के लिए एंट्री ओर एग्ज़िट दोनो ही टोंक जिला बन चुका है। झालावाड़, चित्तौड़ दोनो जिले अफीम के उत्पादन में अग्रणी है।
गांजे की खेती भी इसी की आड़ में फलती-फूलती रही है। अब दौर स्मेक का चल निकला है। तस्करों के हिसाब से ये धंधा ज्यादा मुनाफे और कम रिस्क का इसलिए है कि स्मेक की कीमत 3 से 4 करोड़ रुपये किलो है जबकि बिकती मिलीग्राम में है।
परिवहन में आसानी
बेशकीमती स्मेक परिवहन की दृष्टि से तस्करों के आसान है। कुछ मिलीग्राम स्मेक कागज की पुड़की में शरीर के किसी हिस्से में रखकर कही भी ले जाई सकती है। गन्धहीन होने से इसको लेजाने में अपराधियों के लिए रिस्क नही है। कुछ अरसे से स्मेक के कारोबार में महिलाओं का जुड़ना बड़ा खतरे का संकेत है। स्मेक के कारोबार व परिवहन में महिलाओं के जुड़ने की वजह भी इसलिए है कि उन्हें तस्करों से अच्छा पैसा मिल जाता है।
दूसरा जो तथ्य है वह ये है कि महिलाओं पर कोई शक नही करता और करोड़ो का माल सीमाओं को लांघकर न जाने कहां पहुँच जाता है, जिसकी कल्पना तक नही की जा सकती। अभी हाल में देवली में 38 लाख की स्मेक बरामद होना ये ताईद करता है कि देवली की सीमा तस्करों के लिए एक कॉरिडोर बन गया है। जिस पर पुलिस प्रशासन को सचेत रहने की जरूरत है। गौरतलब है अफीम से गन्ध आती है। शराब से भी गन्ध आती है। लेकिन स्मेक गन्धहीन है। साथ ही 100 ग्राम स्मेक ही लाखों की होती है। लिहाजा इसे परिवहन करना आसान है। खास जाति की महिलाएं गत 2 वर्षों से इस धंधे से जुड़ती जा रही है, जो खतरनाक संकेत है। इसे रोका जाना चाहिए।
यह है स्मेक
स्मेक को हेरोइन भी कहते है। ये स्मेक सफेद रंग का पाउडर होता है, जो गन्धहीन पदार्थ है। इसे ब्लेक टार हेरोइन ओपी ओइड ड्रग के नाम से जानते है। ये पोस्ता से निर्मित होती है। ये स्मेक की पुड़िया कुछ मिलीग्राम की होती है, जिससे क़ई लोग नशा करने में समर्थ होते है। तस्करी से आई स्मेक खुराक के हिसाब से पुड़िया में मिलती है। इसे कागज पर रखकर इसके धुंए को सूंघा जाता है। कुछ सिगरेट के जरिए उपयोग में लेते है। इसका प्रभाव तत्काल होता है और इसकी गन्ध सूंघने से मस्तिष्क के स्नायु तंत्र तेजी से असर डालता है। और आदमी नशे में हो जाता है।
शरीर के लिए घातक है स्मेक का नशा
स्मेक का नशा आदमी के लिए बहुत घातक है। नशे से ये मस्तिष्क को पूरी तरह सुन्न कर देता है और स्नायु तंत्र पर व्यापक प्रभाव डालता है। आंखे उनीदी सी और उन्माद जैसी अवस्था स्मेक का ही नतीजा है। इस नशे से मस्तिष्क के सोचने- समझने की क्षमता का विलोम हो जाता है। एक शून्य अवस्था मे आदमी कोई अपराध करने से पीछे नही हटता। देवली शहर में हुई क़ई वारदातों में ऐसे ही लोगों की भूमिकाएं उजागर हुई है। मानसिक अवसाद जैसी अवस्था मे व्यक्ति कुछ बेहतर सोचने की क्षमता खो देता है। स्मेक ऐसा नशा है, जो एक बार करने के बाद छूटता नही और व्यक्ति इस अंधी गली का राही बन जाता है।
इस नशे का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव किडनी, लीवर व फेफड़ो पर पड़ता है। नशे के आदी के लिए ये हालत घातक होती है। स्मेक का नशा भले ही एक घण्टे तक रहता है। लेकिन इसका दुष्प्रभाव पूरे शरीर पर दिखता है। सुस्तता, विचारों की शून्यता, भूख नही लगने जैसे प्रभाव दिखते है।
सतर्कता जरूरी है
ऐसे नशेड़ियों की पहचान आसानी से की जा सकती है। ये नशा काफी घातक है। अपने परिवार में खासकर युवाओं पर नजर रखनी चाहिए। परिजनों के साथ उठबैठ करने वाले दोस्तो की हिस्ट्री पर ध्यान दे। युवकों के मानसिक, शारीरिक अवस्था से अंदाजा लगाएं। अगर संदेहास्पद स्थिति नजर आती है तो तत्काल रोक लगाए। जरूरत पड़ने पर चिकित्सक की राय ले। हाथों, शरीर पर छिद्र देखे तो सावधान हो जाए।



