@राजेन्द्र बागड़ी, वरिष्ठ पत्रकार
Desk News 20 नवम्बर ( दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) रविवार को हिंडोली विधानसभा क्षेत्र के पेच की बावड़ी कस्बे में बीजेपी दिग्गज नेता व राज्यसभा सदस्य डॉ. किरोडी लाल मीणा की हुई चुनावी सभा व वहाँ के एक पत्रकार पर हुए हमले की घटना , मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का बूंदी के गोठड़ा की सभा मे नही आना, सचिन पायलट की उदासीनता जैसे अनेक मुद्दे कांग्रेस उम्मीदवार के लिए बड़ी चुनोती बन गए है।
जिनसे पार पाना फिलहाल मुश्किल प्रतीत हो रहा है। सवाल ये भी है कि क्या ये घटनाएं बीजेपी प्रत्याशी डॉ. प्रभुलाल सैनी के पक्ष में जाएगी ? ये चर्चाएं पूरे हिंडोली विधानसभा क्षेत्र में हो रही है। अब तक मीणा समाज के मतदाता कई घटकों में बंटे नजर आते थे, लेकिन रविवार को हुई उक्त दो घटनाओं से अब विधानसभा क्षेत्र में बड़ा फेरबदल नजर आने लगा है। हालांकि ये सब चुनाव परिणाम से पता चलेगा लेकिन इतना तय है मीणा मतदाताओं का रुख अब बदल रहा है।
नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद से अब तक मीणा समाज के रुझान का पता लगाना मुश्किल लग रहा था। लेकिन रविवार को पेच की बावड़ी में सैनी के पक्ष डॉ. किरोड़ीलाल मीणा की हुई चुनावसभा ने माहौल को बदल दिया है। किरोड़ीलाल मीणा की पगड़ी की लाज रखने के आव्हान ने मीणा समाज के मतदाताओं को सामने आने पर मजबूर कर दिया है, जो चुनाव की दृष्टि से बड़ी घटना है। विधानसभा क्षेत्र में करीब 30 से 32 हजार मीणा मतदाता है। ऐसे में उक्त वोटो की गणित हार-जीत के समीकरणो को व्यापक तौर पर प्रभावित करेगी, ये तय है।

दूसरी एक बड़ी घटना राजनीतिक घटनाक्रम को प्रभावित कर रही है, वह है हिंडोली क्षेत्र में कवरेज करने गए एक पत्रकार पर दबंगो की ओर से हमला। पीड़ित पत्रकार भी मीणा जाति से है, ऐसे में समाज मे आक्रोश होना स्वाभाविक लग रहा है। घटना के मुताबिक यूट्यूब चैनल के पत्रकार रामदयाल मीणा पर हमला तब हुआ, जब वे डॉ. किरोडी लाल की चुनावी सभा को कवरेज करने जा रहे थे। इस घटना से आक्रोशित समाज ने सोमवार को एक बड़ी बैठक भी बुलाई है। ऐसे में दोनो बड़े ट्विस्ट ने हिंडोली विधानसभा क्षेत्र में भारी हलचल पैदा कर दी है। उल्लेखनीय है हिंडोली विधानसभा क्षेत्र में एक समाज विशेष के दबंगो के आतंक को लेकर बीते 10 वर्षो से प्रमुख मुद्दा आमजनों के बीच बना हुआ है। लोग दबे मुहं से चर्चा करते नजर आते है। लोग सहमे हुए भी लगते है लिहाजा खुलकर बात बताने से बचते दिखाई पड़ते है।
विगत दिनों क्षेत्र की ” थाह” मापने के लिए दौरे पर गए तो कई स्थानों पर जमीनों पर कब्जे, दबंगई जैसे कई मुद्दे सुनने को मिले। ये मुद्दे वाकई कांग्रेस के लिए मुसीबत बनने वाले लगते है। चुनावी सभाओं के मामले में बीजेपी प्रत्याशी सैनी ने केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी, कृष्णपाल गुर्जर व मीणा मतदाताओं को साधने के लिए डॉ. किरोड़ीलाल मीणा की सभाएं कर अग्रिम बढ़त हाँसिल कर ली है, वहीं कांग्रेस के अशोक चांदना इस मामले में अभी पिछड़ रहे है। हालांकि उन्होंने ने रविवार को बूंदी के गोठड़ा में राहुल गांधी की चुनावी सभा जरूर करवाई लेकिन उसका मेसेज उतना अच्छा नही गया, जितनी कि अपेक्षा की जा रही थी। भीड़ नही जुटने से भी राहुल गांधी नाराज दिखे। वहीं माली मतदाताओं को मोड़ने के लिहाज से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का सभा मे नही आना भी बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है।

हिंडोली में चांदना की ओर से सचिन पायलट को पोस्टरो में जगह नही देने से भी स्थिति ठीक नजर नही आई। गहलोत गुट में होने की छाप की वजह से पायलट ने भी हिंडोली से किनारा कर लिया। बहरहाल अब मतदान में महज 4 दिन शेष बचे है। जिनमे भी 48 घण्टे पहले चुनाव प्रचार बन्द होना है, ऐसे में सिर्फ दो दिन चुनाव प्रचार की दृष्टि से बाकी बचे है। उक्त दो दिनों में चांदना को उक्त सभी मुद्दों पर पार पाना मुश्किल लग रहा है।


