(धर्म कर्म)
Deoli News 9 मई (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) धर्म ग्रंथों और ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष 17 मई से 30 जून तक विशेष पुण्य फलदायी ‘पुरुषोत्तम मास’ (अधिक मास) होगा। मनु ज्योतिष एवं वास्तु शोध संस्थान के निदेशक बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि सौर और चंद्र वर्ष के बीच के 11 दिनों के अंतर को पाटने के लिए हर तीन साल में इस 13वें महीने की उत्पत्ति होती है।
जिस माह में सूर्य की संक्रांति नहीं होती, उसे ही अधिक मास कहा जाता है। इस बार यह संयोग ज्येष्ठ मास में बन रहा है, जो रविवार 17 मई को कृतिका नक्षत्र और वृष राशि में शुरू होकर अगले महीने 15 जून को मृगशिरा नक्षत्र में संपन्न होगा। मान्यता के अनुसार जब इस मास को स्वामीविहीन होने के कारण ‘मलमास’ कहकर उपेक्षित किया गया, तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम ‘पुरुषोत्तम’ देकर वरदान दिया कि इस माह में की गई भक्ति अक्षय पुण्य प्रदान करेगी। इसी मास में भगवान ने नरसिंह अवतार लेकर ब्रह्माजी के वरदान का मान रखते हुए हिरण्यकश्यप का वध किया था।
वायु पुराण के अनुसार, बिहार के राजगीर स्थित ब्रह्मकुंड का संबंध भी इसी मास की महिमा और ब्रह्माजी के यज्ञ से जुड़ा है।
दान पुण्य का है विशेष महत्व
उन्होंने बताया कि इस पवित्र माह में विवाह, मुंडन, जनेऊ और गृह प्रवेश समेत मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं, लेकिन दान-पुण्य, जप और रुद्राभिषेक का विशेष महत्व है। जातकों को भूमि पर शयन कर सात्विक भोजन करना चाहिए।
भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए लाल चंदन व फूलों से पूजन कर कांस्य पात्र में घी, गुड़ और गेहूं के आटे से बने मालपुओं का दान करना कष्टों से मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।


