Deoli News 14 फरवरी (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) बीसलपुर बांध की जल भराव क्षमता को बढ़ाने के विरोध में चल रहा धरना शनिवार को 53वें दिन भी जारी रहा।
दरअसल विस्थापित और संघर्ष समिति के सदस्य इस मांग पर अड़े हैं कि जब तक उन्हें यह ठोस आश्वासन नहीं मिलेगा कि बांध की भराव क्षमता नहीं बढ़ाई जाएगी। तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा। लोकतंत्र में अपनी मांगों को लेकर कड़ाके की ठंड के बीच संघर्ष कर रहे इन लोगों की विडंबना यह है कि इतने लंबे समय बाद भी शासन या प्रशासन का कोई प्रतिनिधि इन्हें समझाने या संवाद करने नहीं पहुँचा या फिर प्रभावी समझाईश नहीं हुई। शनिवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी की सचिव माया सुवालका धरना स्थल पर पहुंचीं, जिन्हें संघर्ष समिति ने ज्ञापन सौंपकर अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का आग्रह किया।
कम से कम संवाद तो होना चाहिए
हैरानी की बात यह है कि बांध की क्षमता बढ़ाने को लेकर शासन औऱ प्रशासन की चुप्पी और उदासीनता से भ्रम की स्थिति बनी हुई है। यदि क्षमता बढ़ाई जानी है तो उसे स्पष्ट किया जाए और यदि नहीं, तो आश्वासन देकर इस गतिरोध को समाप्त किया जाना चाहिए, लेकिन अनदेखी के कारण आंदोलनकारी परेशान हो रहे हैं। शनिवार को धरने पर संघर्ष समिति अध्यक्ष सत्यनारायण सरसड़ी, सत्यनारायण बूलिया, हरलाल, यादराम, बंसीलाल, सुनीता मीणा, बाबूलाल मीणा और राजबहादुर वर्मा सहित कई लोग मौजूद थे। प्रजातंत्र में यह अनदेखी व चुप्पी गलत है।



