Deoli News 28 मार्च (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) माह रमज़ान करीम के जुमातुल विदा की नमाज शुक्रवार को शहर की विभिन्न मस्जिदों मे अदा की गई। इस दौरान खुदा की बारगाह में शीश झुके और दुआ की गई।

अल अंसार मस्जिद के इमाम मुफ़्ती फारुख लोहार नदवी ने रोज़े के तीसरे अशरे (अंतिम दस दिन) 20 से लेकर 30 वे रोजे पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रमजान शरीफ का तीसरा अशरा जहन्नुम से निजात (नर्क से मुक्ति मार्ग) है। इसमें हमें अपने गुनाहों की रब से माफी मांगनी चाहिए और नेक कार्य करने चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल भूखे प्यासे रहने का नाम रोजा नहीं हैं, बल्कि एक अहसास, तकवा, परहेज़, त्याग क़ा नाम हैं रोज़ा है। उन्होंने अंतिम दस रोजे की पाक रातों की कद्र के बारे में भी बताया कि हमें माहे रमज़ान की 21, 23, 25, 27, 29 वे रोजे की पाक रातों में रब की खूब इबादत करना चाहिए।
रमज़ान की राते सैकड़ों रातों से उत्तम है। नमाज ए जुमा के बाद वतन की खुशहाली, अमन चैन, बेहतर जीडीपी, सौहाद्रपूर्वक त्योहार मनाने की दुआ की गईं। शाही जामा मस्जिद मे शाही इमाम नजमे इफ्तिखार, अल अंसार मस्जिद मे मुफ़्ती फारूक लोहार नदवी, एजेंसी मरकज़ मस्जिद मे मुफ़्ती बरकत तुल्लाह, रिसाला मस्जिद मे हाफ़िज़ मुकीम रज़ा, चार मिनार बाबा अय्यूबी मस्जिद में हाफ़िज़ रहबर रजा मुराबादी, प्रताप कॉलोनी गोसिया मस्जिद में हाफ़िज़ शाहीद रजा, देवली गाँव मस्जिद में मौलाना शमी उल्लाह ने नमाजे जुम्मा अदा करवाई।



