गुरुवार से देवली में शुरू होगा पंचकल्याणक
Deoli News 2 अप्रैल (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) शहर के कुचलवाड़ा रोड जैन कॉलोनी स्थित श्री पार्श्वनाथ मंदिर में पंच कल्याणक एवं नवीन वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। यह महोत्सव गुरुवार से 6 अप्रैल तक चलेगा और मुनिसंघ वैराग्य सागर एवं आर्यिका स्वस्तिभूषण के सानिध्य में आयोजित किया जाएगा।
बुधवार को आर्यिका स्वस्तिभूषण का जहाजपुर चौराहा से बैंड बाजे के साथ शहर में मंगल प्रवेश हुआ। इसके बाद महावीर जैन मंदिर में धर्मसभा का आयोजन किया गया, जिसमें आर्यिका स्वस्तिभूषण ने कहा कि जीव स्वभाव वश जब तक आंखे खुली है। तब तक छोटी छोटी बात पर लड़ता है, लेकिन जब आंखे बंद होती है तो सब यही छोड़कर चला जाता है। उन्होंने कहा कि दुख का कारण बाहरी आवरण है और विचार बदल जाए तो अनंत सुख मिल जाते हैं।
पंचकल्याणक पुण्य बढ़ाने, पाप घटाने एवं मोक्ष गमन का माध्यम है। पंचकल्याणक क्रियाओं को देखकर भगवान बनने का रास्ता मिल जाता है। मुनि वैराग्य सागर ने कहा कि पंचकल्याणक नाटक नहीं है, बल्कि पाषाण को परमात्मा बनाने की क्रिया होती है। उन्होंने कहा कि भगवान पुरुषार्थ से बनते हैं।पंचकल्याणक के माध्यम से पुरुषार्थ को जाग्रत करना है। उन्होंने कहा कि ज्ञान सिर्फ तर्क वितर्क करता है, लेकिन विवेक समर्पण सिखाता है। धर्म सभा में मुनि सुप्रभ सागर ने कहा कि अच्छे भावों से क्रिया की जाती है उसका महत्व है।
पंचकल्याणक से बढ़कर जीवन की कोई क्रिया नहीं हो सकती है। उन्होंने कहा कि हर आत्मा में परमात्मा बनने की शक्ति है, जीवन रूपी बीज को सही उपचारित कर अंतिम लक्ष्य मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है। प्रवचन से पूर्व चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन, मंगलाचरण मुनि एवं आर्यिका को श्रीफल एवं शास्त्र भेंट किया गया।
पहले दिन होंगे कई कार्यक्रम
जैन कॉलोनी मंदिर में पंचकल्याणक एवं नवीन वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव में गुरूवार को कई कार्यक्रम होंगे। प्रतिष्ठाचार्य देवेश शास्त्री, कपिल भैया के निर्देशन में प्रथम दिवस गर्भ कल्याणक में प्रातः देव, गुरुआज्ञा, घट पूजन होगी।
इसके बाद सुबह साढ़े 7 बजे श्रीमहावीर मंदिर से घट व श्रीजी की शोभायात्रा निकलेगी, जो जैन कॉलोनी मंदिर स्थल तक जाएगी। जिसके बाद कार्यक्रम स्थल पर ध्वजारोहण, मंडप उद्घाटन, शुद्वि, अभिषेक, शांतिधारा की जाएगी। दोपहर में सकलीकरण, यागमण्डल विधान, गर्भ कल्याणक संस्कार, गोदभराई, सांय काल महाआरती, शास्त्र प्रवचन, सौधर्म सभा, कुबेर द्वारा नगरी की रचना, सोलह स्वप्न, माताजी का श्रृंगार, अष्टकुमारियो द्वारा मां की सेवा आदि कार्यक्रम होंगे।



