(चुनाव विश्लेषण)
@राजेन्द्र बागड़ी, वरिष्ठ पत्रकार
Desk News 12 नवंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) राजस्थान के बारां जिले के अंता विधानसभा उपचुनाव के आने वाले परिणाम की आशंका ने सभी राष्ट्रीय दलों के नेताओं की धुकधुकी बढ़ा दी है। लगभग 80 फीसदी से ऊपर हुए मतदान से सभी विश्लेषकों के दिमाग हिला दिए है। पहली बार हुए त्रिकोणीय मुकाबले में कौन सीट जीतेगा, ये सवाल सभी के लिए अजूबा होगा।

अंता में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, सचिन पायलट, गोविंद सिंह डोटासरा, मुख्यमंत्री भजनलाल समेत कई दिग्गजों की साख दांव पर है। जीत के दावे सबके है पर मतदान की गणित ईवीएम में बंद है, जो 14 नवम्बर को आंकड़े उगलेगी। ईवीएम जैसे ही आंकड़े उगलेगी, वैसे आग लगेगी… चाहे परिणाम किसी के पक्ष में आए। खामोश वोटिंग ने कुछ तो गुल खिलाया है!! प्रमोद जैन भाया, मोरपाल सुमन और निर्दलीय नरेश मीणा के बीच जबरदस्त वोटों का बंटवारा हुआ है। अल्पसंख्यक मतदाताओं में सेंध लगी है!! एससी वोटर्स भी बंटे है!! एसटी वोटों पर नरेश का साया मंडराया है तो संकेत है फिर कांग्रेस की नैया कैसे पार लगेगी?
ये ही तो कांग्रेस का वोट बैंक है। बीजेपी के मोरपाल सुमन के लिए वसुंधरा संजीवनी तो बनी है। लेकिन धाकड़, गुर्जर वोटिंग ट्रेंड किधर रहा ये दिलचस्प रहेगा। माली वोटर्स भी एकजुट रहा हो, ऐसा सन्देह है!! शहरी वोटिंग जरूर बीजेपी, कांग्रेस के बीच रही और कुछ वोटर्स निर्दलीय को भी गए। लेकिन कुछ ग्रामीण इलाकों में मुख्य मुकाबला बीजेपी और नरेश मीणा के बीच रहा, ऐसा जानकर बताते है। खास बात ये रही कांग्रेस का कोर वोटर्स खिसका है। इसका नुकसान भाया को सम्भावित है! वसुंधरा राजे की कड़ी मेहनत के बावजूद बीजेपी का कोर वोटर्स भी फिसलकर डिवीजन हुआ है तो नुकसान तो बीजेपी को भी होना संभावित है।
अब कुलमिलाकर जोड़ बाकी करें तो बीजेपी, निर्दलीय और कांग्रेस के बीच जबरदस्त टक्कर दिखाई दे रही है। निर्दलीय को दोनों दलों के प्रत्यशियों से खिसका वोट कितना मिला है, ये परिणामो को उलट-पलट कर सकता है। अंता हालांकि हर किसी की समझ से बाहर इसलिए हे कि एसटी वोटर्स नरेश को एकतरफा मिलने से वे भी लगभग बराबरी में है! धाकड़, गुर्जर वोट निर्णायक है। जिनमे भले ही डिवीजन हुआ हो लेकिन इस बड़े तबके का वोट प्री बीजेपी वोट माना जाता रहा है। अनुमान लगाया जा सकता है कि ये आखिर में किसे नुकसान करेगा ओर किसे आगे टक्कर तक ले जाएगा। खबरे जो कुछ भी हो लेकिन ये तय है कांग्रेस को नुकसान पहुचने के समाचार ज्यादा है।
हालांकि कांग्रेस के भाया को नुकसान की भरपाई बीजेपी के कोर वोटर्स से करनी पड़ी होगी और यदि ऐसा हुआ तो फिर नुकसान किसे होगा, ये कहना आवश्यक नही है। बहरहाल गणित भले ही उलझी हो, लेकिन कांग्रेस के लिए कोई बेहतर खबर नही है। अब रही बीजेपी की बात तो उनके कोर वोटर्स में डिवीजन हुआ है तो कांग्रेस, बीजेपी से खिसके वोट निर्दलीय को ही गए! ऐसे में अंता का चुनाव परिणाम कइयों की राजनीति का अंत करेगा। बीजेपी जीती तो सारा श्रेय वसुंधरा को जाएगा! कांग्रेस अगर जीती तो श्रेय कईयों को जाएगा। लेकिन अगर भारी उलटफेर हुआ तो घमासान तय है !
दो दिन के भीतर कई ऐसी खबरें आई जो चौकाने वाली है पर लिखने लायक इसलिए नही कि उन पर भरोसा नही किया जा सकता। लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि 14 नवम्बर को निकलने वाला चुनाव परिणाम नया इतिहास लिखेगा।


