“बाबा गफ्फार अली शाह का उर्स”
Deoli News 10 फरवरी (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) शहर में सांप्रदायिक सद्भाव के प्रतीक हजरत बाबा अब्दुल गफ्फार अली शाह वली (रह.) का दो दिवसीय सालाना उर्स मुबारक अकीदत और रूहानी उत्साह के साथ मनाया गया।
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इंतजामिया कमेटी के मुतवल्ली शकील बंटी कुरैशी, नूर मोहम्मद, इमरान और इरफान चिश्ती की सरपरस्ती में आयोजित उर्स के दौरान विभिन्न धार्मिक रस्में अदा की गईं। शाम को दरगाह परिसर में विशाल लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में जायरीनों ने शिरकत की। रात्रि में आयोजित महफिल-ए-कव्वाली उर्स का मुख्य आकर्षण रही, जहाँ नामचीन कव्वालों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। मध्यप्रदेश के जबलपुर से आए मशहूर कव्वाल हलीम ताज जबलपुरी ने जब “भर दो झोली मेरी या मोहम्मद, लौट कर आज मैं न जाऊँगा खाली” जैसे कलाम पेश किए, तो पूरा परिसर तालियों की गूँज से भर उठा।
इसी तरह साबरी ब्रदर्स के गायक सदाकत साबरी ने अपनी जादुई आवाज में “दमा दम मस्त कलंदर”, “शाह-ए-समंदर” और “दुल्हन बनी है दिल्ली आज, दूल्हा बना है ख्वाजा” सहित सूफियाना कलाम पेश कर जायरीनों को झूमने पर मजबूर कर दिया। समाज के प्रतिनिधि मोहम्मद इदरीस ने बताया कि उर्स के दौरान शहरभर में आपसी भाईचारे और अमन-चैन की दुआ मांगी गई, जिसमें सभी वर्गों के लोगों ने हिस्सा लिया।
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