Monday, August 17, 2026
No menu items!
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img
HomeDainik Bureau Deskचैयरमेन की कुर्सी अनुसूचित जाति के खाते में, लेकिन चुनावी घमासान सामान्य...

चैयरमेन की कुर्सी अनुसूचित जाति के खाते में, लेकिन चुनावी घमासान सामान्य सीटों पर

18 सामान्य सीटों पर सबसे बड़ा संग्राम! आरक्षण ने बदला देवली का चुनावी गणित

@आशीष बागड़ी


Deoli News 17 अगस्त (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) देवली नगर पालिका चुनाव 2026 की आरक्षण लॉटरी सामने आते ही शहर की चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। 35 वार्डों के आरक्षण ने कहीं दावेदारों की राह आसान की है तो कहीं चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे कई चेहरों का गणित बदल दिया है।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि 35 में से 18 वार्ड सामान्य श्रेणी के हैं, यानी आधे से अधिक वार्डों में मुकाबला खुला रहेगा। ऐसे में सामान्य सीटों पर टिकट और जीत के लिए सबसे ज्यादा घमासान देखने को मिल सकता है।

18 सामान्य सीटें बनीं सबसे बड़ा चुनावी मैदान

देवली के 35 वार्डों में 12 सामान्य और 6 सामान्य महिला, यानी कुल 18 वार्ड अनारक्षित हैं। इन वार्डों में किसी एक आरक्षित वर्ग की बाध्यता नहीं होने के कारण अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक समीकरण वाले दावेदार मैदान में उतर सकते हैं। यही वजह है कि इन सीटों पर संभावित प्रत्याशियों की संख्या सबसे अधिक रहने की संभावना है। लिहाजा भी इन्हीं सीटों पर ज्यादा होगा।

अनुसूचित जाति को 8, अन्य पिछड़ा वर्ग को 6 सीटें

आरक्षण में अनुसूचित जाति वर्ग की 8 सीटें हैं। इनमें 5 सीटें अनुसूचित जाति तथा 3 सीटें अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित हैं। वहीं अन्य पिछड़ा वर्ग के 6 वार्ड हैं, जिनमें 4 अन्य पिछड़ा वर्ग तथा 2 अन्य पिछड़ा वर्ग महिला सीटें हैं। अनुसूचित जनजाति के लिए 3 वार्ड आरक्षित किए गए हैं, जिनमें 2 अनुसूचित जनजाति और 1 अनुसूचित जनजाति महिला सीट शामिल है।

12 वार्डों में महिलाओं की सीधी दावेदारी

लॉटरी ने महिला दावेदारों के लिए भी चुनावी मैदान खोल दिया है। कुल 12 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। इनमें 6 सामान्य महिला, 3 अनुसूचित जाति महिला, 2 अन्य पिछड़ा वर्ग महिला और 1 अनुसूचित जनजाति महिला वार्ड शामिल हैं। इन सीटों पर अब नए महिला चेहरों के सामने आने की संभावना है। कई वार्डों में राजनीतिक परिवारों से जुड़े दावेदारों की जगह उनके परिवार की महिला सदस्य चुनावी मैदान में नजर आ सकती हैं।

अध्यक्ष पद भी “अनुसूचित जाति” के लिए आरक्षित

देवली नगर पालिका के अध्यक्ष पद की पूर्व में हुई आरक्षण लॉटरी में पद अनुसूचित जाति के लिए खुला है। ऐसे में वार्डों के आरक्षण के साथ अध्यक्ष पद का आरक्षण भी चुनावी समीकरण में बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। अब अनुसूचित जाति वर्ग से अध्यक्ष पद की दौड़ में आने वाले संभावित चेहरों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज होने की संभावना है।

किस श्रेणी का रहेगा सबसे ज्यादा दबदबा?

सीटों की संख्या देखें तो सामान्य श्रेणी का दबदबा सबसे अधिक रहेगा। कुल 35 में 18 सीटें सामान्य हैं। आरक्षित वर्गों में अनुसूचित जाति की 8 सीटों के साथ सबसे बड़ी हिस्सेदारी है। इसके बाद अन्य पिछड़ा वर्ग की 6 और अनुसूचित जनजाति की 3 सीटें हैं। हालांकि चुनावी दबदबा केवल सीटों की संख्या से तय नहीं होगा। सामान्य सीटों पर कई दावेदारों के बीच मुकाबला, आरक्षित सीटों पर मजबूत स्थानीय चेहरों की मौजूदगी और महिला सीटों पर नए प्रत्याशियों की एंट्री चुनाव का पूरा समीकरण बदल सकती है।

लॉटरी के बाद बढ़ी चुनावी हलचल

आरक्षण की तस्वीर साफ होते ही संभावित प्रत्याशियों ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। सामाजिक संपर्क, बैठकों और प्रचार-प्रसार का दौर शुरू हो गया है। कई दावेदार अब अपने वार्ड की आरक्षण स्थिति के अनुसार चुनावी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। राजनीतिक दलों में भी टिकट के दावेदारों को लेकर चर्चाएं तेज होने लगी हैं। अब असली मुकाबला यह देखने का होगा कि 18 सामान्य सीटों पर कौन-कौन से चेहरे मैदान में उतरते हैं और आरक्षित 17 सीटों पर स्थानीय समीकरण किसके पक्ष में जाता है। वहीं अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने से इस बार देवली नगर पालिका चुनाव में अनुसूचित जाति वर्ग के वार्डों और संभावित दावेदारों की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

आरक्षण ने चुनावी बिसात बिछा दी है, अब 35 वार्डों में कौन बाजी मारता है और किसके सिर अध्यक्ष पद का ताज सजता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

देवली नगर पालिका के 35 वार्डों का आरक्षण तय, लॉटरी में निकली श्रेणियां

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here