मां हिंगलाज का चमत्कार, आस्था व श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है चांदली माता
Deoli News 4 अक्टूबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) चांदली की तलहटी में पहाड़ों पर विराजमान हिंगलाज माता के आंगन में बिखरे पत्थर को घिसकर आंखों की पलकों पर लगा देने या अखंड ज्योति के काजल को लगा देने मात्र से आंखों की रोशनी लौट आती है। ऐसी मंदिर की मान्यता है। यह सुनने में भले ही रोचक लगे, लेकिन वाकई सच है।
दरअसल चांदली गांव में सरोवर के समीप ऊंची पहाड़ी पर विराजमान हिंगलाज मातेश्वरी की आस्था प्रबल हो तो बिगड़े हुए काम भी बन जाते हैं। चांदली की हिंगलाज मां को नेत्रदान करने वाली माताजी के नाम से भी जाना जाता है। यही नहीं माता की अखंड ज्योत का काजल आंखों में लगाने से लोगों की नेत्र ज्योति लौट आती है। ऐसे कई उदाहरण नवरात्रा में मंदिर में श्रद्धालुओं से बात करने पर सामने आते हैं। 75 वर्षीय वृद्ध श्योजी गुर्जर का कहना है कि यह तो माता रानी के आस्था का चमत्कार है। यदि माता जी की अखंड ज्योत का काजल उपलब्ध नहीं होता है तो माता की दहलीज पर ढोक लगाकर परिसर में बिखरे छोटे-छोटे कंकड़ पत्थर घर ले जाए और रोज घिसकर आंखों की ऊपर नीचे की पलकों पर लगाए। इससे ही धीरे धीरे आंखों की रोशनी लौट आती है, लेकिन ध्यान रखें कि जो पत्थर उठाकर ले गए हैं उसे वापस भी लाना होगा।
यदि यह पत्थर गुम हो गया तो उसके वजनी सोने चांदी के आभूषण नेत्र छत्र चढ़ाना होता है। मंदिर के दुर्गालाल सेन एवं ट्रस्ट के छीतर लाल आदि का कहना है कि यहां माता रानी के दरबार मे सालाना 50 से 60 जनों की आंखें माता रानी की कृपा से रोशन हो जाती है। लेकिन इन सब के पीछे माता रानी मे विश्वास का होना जरूरी है। माता रानी के दरबार में कई असाध्य बीमारियों का इलाज होता है तो प्रेत बाधाओं को भी माता रानी दूर करती है। सामान्य दिनों के अलावा नवरात्र में हर वर्ष हजारों श्रद्धालु दूर-दूर से आकर माता के दरबार में सिर झुकाते हैं।



