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आम कार्यकर्ता की पहुंच में है राजेंद्र गुर्जर, यही वजह है उनकी जीत की…

डेढ़ गुना अधिक वोटो से हासिल की गुर्जर ने जीत 


Deoli News 24 नवंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) देवली उनियारा विधानसभा सीट पर बीजेपी ने 11 साल बाद फिर से जीत हासिल की है। बीजेपी केे राजेंद्र गुर्जर ने इस सीट पर अपना कब्जा जमाया है। पिछले 2018 और 2023 के विधानसभा चुनाव में यह सीट कांग्रेस के पाले में रही।

इससे पहले राजेंद्र गुर्जर ने 2013 में जीत हासिल की थी, लेकिन इस चुनाव में गुर्जर ने पिछली बार की अपेक्षा करीब डेढ़ गुणा से अधिक वोटों से जीत हासिल की है। इसे लेकर सियासी गलियारों में चर्चा है। देवली उनियारा में सर्वाधिक मीणा वोट बैंक है, ऐसे में राजेंद्र गुर्जर और बीजेपी ने साइलेंटली कार्य करते हुए अपनी जीत की समीकरणें बनाई। वहीं त्रिकोणीय मुकाबले ने भी गुर्जर को जिताने में मदद की है।

यह है बीजेपी के राजेंद्र गुर्जर

देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र मीणा और गुर्जर बाहुल्य वर्ग की सीट है। इनमें सर्वाधिक वोटर्स मीणा समाज के हैं, जहां विधानसभा में 3 लाख 2 हजार से अधिक वोटर्स है। इनमें मीणा समाज के करीब 52 हजार मतदाता है। इसके अलावा गुर्जर समाज की बात करें, तो यहां उनके करीब 44 हजार मतदाता है। अब तक के इतिहास में इस सीट पर गुर्जर या मीणा उम्मीदवार ही जीतते आए है।

पिछली बार 2013 की जीत के मुकाबले राजेंद्र गुर्जर ने इस उपचुनाव में करीब डेढ़ गुना अधिक अंतर से जीत हासिल की है। पिछली बार 2013 में राजेंद्र गुर्जर को 29 हजार से अधिक वोटों से जीत मिली थी, लेकिन इस बार उपचुनाव में राजेंद्र गुर्जर 41 हजार 121 वोट से जीते है।

बीजेपी और गुर्जर ने साइलेंटली बनाई डगर

2018 और 2023 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों में देवली उनियारा से मीणा उम्मीदवार ही भारी पड़ा है। दोनों बार कांग्रेस की तरफ से हरीश मीणा चुनाव जीते, लेकिन इस बार भाजपा ने अपने माइक्रो मैनेजमेंट के जरिए राजेंद्र गुर्जर की जीत की डगर तैयार की, जो साइलेंटली तौर पर थी। हालाकि उनके सामने उनियारा से लोकल उम्मीदवार कस्तूरचंद मीणा भी मैदान में थे, लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा का भी गुर्जर को सियासी फायदा मिला। नरेश के कारण मीणा वोटर्स में बंटवारा हुआ है। इससे भी गुर्जर की जीत आसान हुई है। हालाकि इस दौरान थप्पड़ कांड के बाद नरेश की भी जीत के कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन यह बात भी सही है कि नरेश मीणा ने भी करीब 60 हजार वोट लाकर अपना लोहा मनवा दिया। जिसकी उम्मीद लोगों को कम थी।

दूसरी बार विधायक बने गुर्जर

राजेंद्र गुर्जर इस उपचुनाव में दूसरी बार जीत कर विधायक चुने गए हैं। इससे पहले 2013 के चुनाव में भी 29 हजार से अधिक मतों से जीत हासिल कर विधायक चुने गए थे, तब वसुंधरा राजे प्रदेश की मुख्यमंत्री थी। गुर्जर देवली उनियारा विधानसभा क्षेत्र में अपनी अच्छी खासी पकड़ रखते हैं। इसका मुख्य कारण उनका लो प्रोफाइल होना, जो उन्हें क्षेत्र के लोगों में लोकप्रिय बनाता है। लोगों से सहज भाव से मिलना और उनके हर समय लोगों के फोन का जवाब देना, राजेंद्र गुर्जर का स्वभाव है। इसी कारण लोग उन्हें काफी पसंद करते हैं। 2023 के चुनाव में भी गुर्जर को टिकट देने के लिए काफी मांग उठी थी,

लेकिन उस समय बीजेपी ने गुर्जर नेता विजय बैंसला को टिकट दिया। हालांकि इस चुनाव में बैंसला चुनाव हार गए और हरीश मीणा दूसरी बार विधायक चुने गए, लेकिन बीजेपी की हार का यह वनवास एक साल में ही समाप्त हो गया। हरीश मीणा के सांसद चुने जाने के बाद फिर से देवली उनियारा उपचुनाव में बीजेपी ने इस सीट पर कब्जा बनाया है।

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