मंदिरों में सजेगी झांकी, आज रात 12 बजे मनाएंगे कान्हा के जन्म की खुशियां
Deoli News 4 सितंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्य एवं मनु ज्योतिष एवं वास्तु शोध संस्थान टोंक के निदेशक बाबूलाल शास्त्री के अनुसार इस बार करीब 15 वर्ष बाद जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी की मध्यरात्रि रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसके चलते जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र का विशेष महत्व माना जाता है। शास्त्री ने बताया कि 4 सितंबर को अष्टमी तिथि अर्द्धरात्रि 12:13 बजे तक तथा रोहिणी नक्षत्र रात 11:04 बजे तक रहेगा। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के लिए मध्यरात्रि निशीथ काल रात 11:56 से 12:41 बजे तक रहेगा, जिसमें महाअभिषेक करना श्रेष्ठ एवं फलदायी माना गया है। इस वर्ष रामानंदी और वैष्णव दोनों संप्रदायों द्वारा एक ही दिन जन्माष्टमी मनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि जन्माष्टमी पर बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की पूजा एवं उपवास करना चाहिए। पंचामृत से भगवान को स्नान कराकर माखन-मिश्री, पंजीरी, फल एवं मिष्ठान का भोग लगाना शुभ माना जाता है।

अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का यह संयोग भगवान श्रीकृष्ण की आराधना के लिए विशेष फलदायी माना गया है। देवली विभिन्न मंदिरों में ठाकुर जी समेत की झांकी सजाई जाएगी। अग्रवाल धर्मशाला में विराजमान श्री चारभुजा नाथ की फुल बंगला झांकी बनेगी। इसे लेकर तैयारी शुरू हो चुकी है। इसी तरह सांवरिया सेठ समेत मंदिरों में झांकी सजाई जाएगी।
इससे पहले देवली गांव में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व गुरुवार रात मनाया गया। यहां हर वर्ष अष्टमी से एक दिन पहले श्री कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस मौके पर देवली गांव के मंदिरों में सजावट हुई।


